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Friday, 24 April, 2026
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बढ़ती अर्थव्यवस्था के सहारे स्वच्छ ऊर्जा का रुख कर सकता है भारत: लैंसेट अधिकारी

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(अपर्णा बोस)

नयी दिल्ली, 31 अक्टूबर (भाषा) भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और प्रौद्योगिकी क्षमताएं उसे कोयले से स्वच्छ नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ने का एक अनूठा अवसर देती हैं। लैंसेट काउंटडाउन की एक शीर्ष अधिकारी ने यह उम्मीद जताते हुए नवीकरणीय ऊर्जा में अधिक सरकारी निवेश का आग्रह किया ताकि भारत में प्रदूषण से होने वाली मौतों को कम किया जा सके।

लैंसेट काउंटडाउन की कार्यकारी निदेशक मेरीना बेलेन रोमानेलो ने ‘पीटीआई वीडियो’ के साथ एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में काम करने की काफी गुंजाइश है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन उपायों से नागरिकों को महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ भी होंगे।

रोमानेलो ने कहा, ”भारत एक प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में उभर रहा है और स्थानीय इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी नवाचार में इसकी उन्नत क्षमताएं इस बदलाव का नेतृत्व करने के लिए अच्छी स्थिति में है। कोयले महंगा और अत्यधिक प्रदूषणकारी है, और इससे स्वच्छ, नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ने के लिए पर्याप्त निवेश और मजबूत सरकारी समर्थन की जरूरत होगी।”

उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा तक पहुंच बढ़ाने के लिए भारत सरकार के प्रयास महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इसकी पूरी क्षमता हासिल करने के लिए इसे और मजबूत करना चाहिए।

‘द लैंसेट’ पत्रिका की एक वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार मानव-जनित पीएम2.5 प्रदूषण के कारण 2022 में भारत में 17 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई। यह आंकड़ा 2010 से 38 प्रतिशत अधिक है। इसमें जीवाश्म ईंधन के उपयोग से 44 प्रतिशत मौतें हुईं।

इन मृत्यु दर अनुमानों की गणना के तरीके के बारे में पूछे जाने पर रोमानेलो ने बताया कि ये पद्धतियां मापे गए आंकड़ों को जोड़ती हैं – जो बताती हैं कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कितना प्रदूषण पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े भले ही अनुमान पर आधारित हैं, लेकिन ये वर्तमान वैज्ञानिक विधियों के आधार पर वायु प्रदूषण से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी सर्वोत्तम समझ का प्रतिनिधित्व करते हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने जुलाई 2024 में राज्यसभा को बताया था कि देश में ऐसा कोई निर्णायक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है जो वायु प्रदूषण के कारण होने वाली मृत्यु/बीमारी के बीच सीधा संबंध स्थापित कर सके।

रोमानेलो ने इस कथन से असहमति जताते हुए कहा कि इस बात के पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं कि वायु प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए कितना हानिकारक है। उन्होंने कहा कि इनकार करने से कार्रवाई में देरी होती है और प्रदूषण से होने वाले आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी नुकसान बढ़ सकते हैं।

भाषा पाण्डेय प्रेम

प्रेम

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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