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Saturday, 25 April, 2026
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चालू वित्त वर्ष में भारत का चावल निर्यात 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ेगा: एपीडा

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नयी दिल्ली, 30 अक्टूबर (भाषा) एपीडा के चेयरमैन अभिषेक देव ने बृहस्पतिवार को कहा कि विदेशी बाजारों से बेहतर मांग के कारण इस वित्त वर्ष में भारत का चावल निर्यात मात्रा के के स्तर पर 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ने की संभावना है।

वित्त वर्ष 2024-25 में, भारत ने 12.95 अरब डॉलर मूल्य के 2.01 करोड़ टन चावल का निर्यात किया, जो 172 से अधिक देशों तक पहुंचा।

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) वाणिज्य मंत्रालय की एक इकाई है जो देश के कृषि निर्यात से संबंधित मुद्दों को देखती है।

देव ने यहां आयोजित भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (बीआईआरसी) 2025 के मौके पर पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘इस वित्त वर्ष में चावल निर्यात बढ़ेगा। हम मात्रा के लिहाज से दोहरे अंक में वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि मूल्य के लिहाज से भी निर्यात बढ़ेगा।

दो दिवसीय वैश्विक चावल सम्मेलन बृहस्पतिवार को यहां भारत मंडपम में शुरू हुआ।

इस सम्मेलन का आयोजन भारतीय चावल निर्यातक संघ (आईआरईएफ) द्वारा किया जा रहा है। एपीडा इस आयोजन को गैर-वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है।

देव ने चावल की विभिन्न किस्मों के साथ-साथ चावल आधारित प्रसंस्कृत उत्पादों जैसे राइस क्रैकर्स के निर्यात को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

एपीडा चेयरमैन ने कहा कि सरकार ने 26 देशों की पहचान की है, जो वर्तमान में भारत से बहुत कम मात्रा में चावल खरीदते हैं। उन्होंने कहा कि फिलिपीन सहित इन 26 देशों में निर्यात की अपार संभावनाएं हैं।

देव ने कहा, ‘‘हम भारतीय चावल की किस्मों को बढ़ावा देने के लिए इन 26 देशों में एक प्रतिनिधिमंडल भेज रहे हैं।’’

आईआरईएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने कहा कि इन 26 देशों के व्यापार प्रतिनिधियों को इस सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है, जहां भारत चावल की विभिन्न किस्मों का प्रदर्शन कर रहा है।

इस आयोजन में लगभग 10,000 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

यह सम्मेलन उत्पादकों, निर्यातकों, आयातकों, नीति निर्माताओं, वित्तपोषकों, लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञों, अनुसंधान संस्थानों और संबद्ध सेवा प्रदाताओं को एक साथ लाता है।

सितंबर में चावल का निर्यात 33.18 प्रतिशत बढ़कर 92.5 करोड़ डॉलर और अप्रैल-सितंबर के दौरान 10 प्रतिशत बढ़कर 5.63 अरब डॉलर का हो गया।

भारत दुनिया के सबसे बड़े चावल उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है, जो 172 से अधिक देशों को आपूर्ति करता है।

भारत ने 2024-25 में लगभग 4.7 करोड़ हेक्टेयर से लगभग 15 करोड़ टन चावल का उत्पादन किया, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 28 प्रतिशत भाग है।

उन्नत बीज किस्मों, बेहतर कृषि पद्धतियों और विस्तारित सिंचाई कवरेज के कारण औसत पैदावार फसल वर्ष 2014-15 के 2.72 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर फसल वर्ष 2024-25 में लगभग 3.2 टन प्रति हेक्टेयर हो गई है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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