(अदिति खन्ना)
लंदन, 29 अक्टूबर (भाषा) ब्रिटेन के महाराजा चार्ल्स तृतीय और महारानी कैमिला ने बुधवार को लंदन में बीएपीएस श्री स्वामीनारायण मंदिर, जिसे नेसडेन मंदिर के नाम से जाना जाता है, की 30वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रार्थना और धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया।
महाराजा (76) का स्वागत मुख्य पुजारी साधु योगविवेकदास स्वामी द्वारा पारंपरिक नादचड़ी या शांति और मैत्री के प्रतीक पवित्र धागा बांधने की रस्म के साथ किया गया।
प्रवेश द्वार पर अपने जूते उतारने वाले राजपरिवार के सदस्यों को मोतियों से बंधे फूलों की माला पहनाई गई, जिसके बाद उन्हें अलंकृत मंदिर परिसर का भ्रमण कराया गया – यह यूरोप का पहला पारंपरिक हिंदू पत्थर मंदिर है, जिसका उद्घाटन अगस्त 1995 में हुआ था।
मंदिर के प्रमुख देवता भगवान स्वामीनारायण की पवित्र प्रतिमा पर 11 वर्षीय स्कूली छात्र देव पटेल ने पुष्पांजलि अर्पित की, जबकि महाराजा ने हाथ जोड़कर नमस्कार किया।
उन्होंने दक्षिण-पूर्व लंदन से आए पटेल परिवार द्वारा भगवान स्वामीनारायण के किशोर रूप श्री नीलकंठ वर्णी महाराज के अभिषेक समारोह का अवलोकन करने के बाद आभार व्यक्त किया और उपस्थित लोगों को “ दिवाली की शुभकामनाएं” दीं। दिवाली का त्योहार 20 अक्टूबर को था।
साधु योगविवेकदास ने अपने स्वागत भाषण में कहा, “यह मंदिर ईश्वर का घर है। पिछले 30 वर्षों में, यह हमारे महान राष्ट्र के धार्मिक, सांस्कृतिक परिदृश्य का एक अभिन्न अंग बन गया है; न केवल अपनी साझेदारी के लिए, बल्कि अपनी पहचान – भक्ति, शिक्षा और सेवा के एक जीवंत केंद्र – के लिए भी प्रशंसनीय है।”
बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था ब्रिटेन के अध्यक्ष जीतू पटेल के साथ अपने दौरे के दौरान, महाराजा और महारानी ने 10 मीटर ऊंचे केंद्रीय गुंबद को रुककर निहारा और उसकी तारीफ। केंद्रीय गुंबद अपनी जटिल नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है।
मंदिर के “हवेली” प्रांगण में राजपरिवार ने पेरिस में निर्माणाधीन नए बीएपीएस मंदिर का प्रारूप देखा। यह मंदिर अगले वर्ष खुलने पर फ्रांस का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर बन जाएगा।
भाषा प्रशांत रंजन
रंजन
रंजन
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
