जोहानिसबर्ग, 28 अक्टूबर (भाषा) दक्षिण अफ्रीका की एक मंत्री ने जी20 के एक कार्यक्रम में कहा कि मानव भाषा प्रौद्योगिकियों और एआई को पहुंच का विस्तार करने, विविधता की रक्षा करने तथा यह सुनिश्चित करने में मदद करनी चाहिए कि कोई भी भाषा और कोई भी समुदाय पीछे न छूटे।
दक्षिण अफ्रीका की खेल, कला और संस्कृति उप मंत्री पीस माबे, डरबन से लगभग 60 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित लुथुली संग्रहालय में क्वाजुलु नटाल प्रांत के जी20 संस्कृति कार्य समूह को संबोधित कर रही थीं।
पिछले हफ्ते हुए इस कार्यक्रम में यूनेस्को सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ-साथ जी20 देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए थे। वे अगले महीने जोहानिसबर्ग में होने वाले शिखर सम्मेलन की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें वैश्विक नेता भाग लेंगे। इस शिखर सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका जी20 की आगामी वर्ष की अध्यक्षता अमेरिका को सौंप देगा।
जी20 संस्कृति कार्य समूह की बैठक में सांस्कृतिक लचीलेपन और सतत विकास में भाषाओं की भूमिका पर चर्चा हुई।
माबे ने कहा, ‘‘मानव भाषा प्रौद्योगिकियों और एआई को पहुंच का विस्तार करने, विविधता की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने में मदद करनी चाहिए कि कोई भी भाषा और कोई भी समुदाय पीछे न छूटे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधि के रूप में, जी20 सदस्य, विकास को गति देने में संस्कृति और भाषा के महत्व को उजागर करने के लिए अद्वितीय स्थिति में हैं। इसमें भाषाई विविधता को बढ़ावा देना, पहुंच को सक्षम बनाना और स्वदेशी भाषाओं और ज्ञान प्रणालियों की रक्षा के लिए डिजिटल नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का जिम्मेदारी से लाभ उठाना शामिल है।’’
भाषा वैभव मनीषा
मनीषा
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