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कुआलालंपुर, 27 अक्टूबर (भाषा) भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्क के कारण दोनों देशों में पैदा हुए तनाव के बाद द्विपक्षीय संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के प्रयासों के बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को यहां वार्ता की।
जयशंकर और रुबियो की मुलाकात कुआलालंपुर में दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) के वार्षिक शिखर सम्मेलन से इतर हुई।
जयशंकर ने सोशल मीडिया एक ‘पोस्ट’ में लिखा, ‘‘कुआलालंपुर में आज सुबह विदेश मंत्री रुबियो से मिलकर खुशी हुई। हमारे द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर हुई चर्चा की सराहना की।’’
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने के बाद से नयी दिल्ली और वाशिंगटन के संबंधों में गंभीर तनाव पैदा हो गया है। इस शुल्क में रूसी कच्चे तेल की खरीद पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है।
भारत ने अमेरिका के इस कदम को ‘‘अनुचित, असंगत और अविवेकपूर्ण’’ बताया।
ऐसा समझा जाता है कि जयशंकर और रुबियो ने दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर भी व्यापक चर्चा की।
हालांकि, इस बात का कोई संकेत नहीं था कि अमेरिकी पक्ष ने भारत को रूस के साथ ऊर्जा संबंधों के लिए लगाए गए 25 प्रतिशत शुल्क को हटाने का आश्वासन दिया है।
पिछले कुछ हफ्तों में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनसे कहा है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद कर देगा। ट्रंप के पहले दावे के बाद, भारत ने कहा था कि ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई है।
विदेश मंत्रालय ने 16 अक्टूबर को कहा कि ऊर्जा स्रोतों को व्यापक और विविध बनाया जा रहा है, जिसमें अमेरिका से खरीद का विस्तार भी शामिल है।
इसमें कहा गया है कि भारत की ऊर्जा खरीद पूरी तरह से अस्थिर ऊर्जा परिदृश्य में भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के उद्देश्य से निर्देशित होती है, और भारत की ऊर्जा नीति के दोहरे लक्ष्य स्थिर ऊर्जा मूल्य और सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
पिछले हफ्ते, अमेरिकी राष्ट्रपति ने मोदी को फोन करके दिवाली की शुभकामनाएं दीं।
शनिवार को रुबियो ने कहा कि भारत पहले ही अपने तेल पोर्टफोलियो में विविधता लाने में रुचि व्यक्त कर चुका है।
कुल 11 देशों वाले आसियान को इस क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली समूहों में से एक माना जाता है जिसमें भारत, अमेरिका, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया सहित कई अन्य देश इसके वार्ता साझेदार हैं।
समूह के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में मलेशिया कुआलालंपुर में वार्षिक आसियान शिखर सम्मेलन और संबंधित बैठकों की मेजबानी कर रहा है।
भाषा प्रशांत नरेश
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