scorecardresearch
Tuesday, 24 March, 2026
होमदेशअर्थजगतदिल्ली में पटाखों की बिक्री में उछाल: आरडब्ल्यूए ने नियमों के उल्लंघन पर चिंता व्यक्त की

दिल्ली में पटाखों की बिक्री में उछाल: आरडब्ल्यूए ने नियमों के उल्लंघन पर चिंता व्यक्त की

Text Size:

नयी दिल्ली, 21 अक्टूबर (भाषा) इस दिवाली दिल्ली में पटाखों की बिक्री में तेज़ी देखी गई। व्यापारियों ने बताया कि कारोबार तेज रहा और ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ी। वहीं रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) ने पटाखे फोड़ने की समयसीमा के उल्लंघन और बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त की है।

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार, इस त्योहारी मौसम में पटाखों की भारी मांग रही।

उन्होंने कहा, ‘‘दिवाली से एक दिन पहले ही, ज़्यादातर व्यापारियों के पास स्टॉक खत्म हो गया था। कई लोगों को पटाखे खरीदने के लिए गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद, गाजियाबाद और सोनीपत जाना पड़ा।’’ उन्होंने बताया कि दिल्ली में कुल पटाखों की बिक्री लगभग 500 करोड़ रुपये की रही।’’

सदर बाजार एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि व्यापारियों ने पिछले साल की तुलना में इस साल लगभग 40 प्रतिशत ज़्यादा बिक्री दर्ज की।

उन्होंने कहा, ‘‘पटाखों के साथ-साथ रोशनी और सजावटी सामान जैसी चीज़ों की भी मांग बढ़ी है।’’

उच्चतम न्यायालय ने 15 अक्टूबर को दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में त्योहारों की परंपराओं और पर्यावरण संबंधी चिंताओं के बीच संतुलन बनाते हुए कुछ शर्तों के तहत हरित पटाखों की बिक्री और फोड़ने की अनुमति दी थी।

अदालत के आदेश के अनुसार, दिवाली से एक दिन पहले और दिवाली के दिन हरित पटाखों का इस्तेमाल कुछ खास घंटों तक ही सीमित था – सुबह 6 बजे से 7 बजे के बीच और रात 8 बजे से 10 बजे के बीच। 18 से 21 अक्टूबर के बीच हरित पटाखों की बिक्री की अनुमति थी।

हालांकि, आरडब्ल्यूए ने कहा कि नियमों का व्यापक रूप से उल्लंघन किया गया।

पूर्वी दिल्ली आरडब्ल्यूए संयुक्त मोर्चा के अध्यक्ष बी एस वोहरा ने कहा कि देर रात तक पटाखे फोड़ना जारी रहा।

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि समयसीमा रात 10 बजे थी, फिर भी कई इलाकों में सुबह तीन बजे तक पटाखे फोड़े गए। कई वरिष्ठ नागरिकों और सांस की समस्या वाले लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।’’

यूनाइटेड रेजिडेंट्स जॉइंट एक्शन (यूआरजीए) के अध्यक्ष अतुल गोयल ने कहा कि आरडब्ल्यूए ने पर्यावरण के अनुकूल उत्सवों को बढ़ावा देने के प्रयास किए, लेकिन प्रतिक्रिया सीमित रही।

उन्होंने कहा, ‘‘त्योहारों का उत्साह तो ज़्यादा था, लेकिन जागरूकता और अनुपालन कम रहा। अधिकारियों को अगले साल और सख़्ती से पालन सुनिश्चित करना चाहिए ताकि उत्सव आनंदमय रहें और साथ ही जन स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जा सके।’’

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments