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Monday, 23 March, 2026
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मोनालिसा, एक सोने का शौचालय और अब लुव्र के शाही रत्न : कला-चोरी का एक दिलचस्प इतिहास

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( पेनेलोप जैक्सन, चार्ल्स स्टर्ट विश्वविद्यालय )

बाथर्स्ट (ऑस्ट्रेलिया), 21 अक्टूबर (द कन्वरसेशन) दुनिया के सबसे बड़े कला संग्रहालय ‘लुव्र’ के संग्रह में लगभग पाँच लाख वस्तुएँ हैं, जिनमें से लगभग 30,000 प्रदर्शित हैं, और हर साल औसतन 80 लाख आगंतुक आते हैं। यह किसी भी पैमाने पर बहुत बड़ी बात है, क्योंकि यहाँ बहुत सारे लोगों और वस्तुओं पर नज़र रखनी होती है। और रविवार का दिन विशेष रूप से व्यस्त होता है।

बेहद चतुराई से सोची-समझी योजना के तहत, फ्लोरोसेंट जैकेट पहने चार आदमी रविवार सुबह 9.30 बजे एक ट्रक में लुव्र संग्रहालय पहुँचे। जल्दी से काम शुरू करते हुए, उन्होंने एक सीढ़ी दूसरी मंजिल तक पहुँचाई। उस पर चढ़कर, उन्होंने एक खिड़की की छड़ें काटीं, गैलेरी डी’अपोलोन में प्रवेश किया और बिजली के औज़ारों का इस्तेमाल करते हुए, नौ उत्कृष्ट वस्तुओं पर कब्ज़ा कर लिया।

चुराई गई वस्तुएँ फ्रांस के शाही रत्न थे, जो पहले नेपोलियन तृतीय की पत्नी और कला संरक्षक, महारानी यूजनी के थे।

यहीं से चोरों के लिए मुश्किल खड़ी होती है : इन अमूल्य वस्तुओं का क्या करें? वे इन्हें पहन नहीं सकते क्योंकि ये इतने बड़ी और चमकदार हैं कि किसी का ध्यान गए बिना रह नहीं सकता। और वे इन्हें वैध रूप से बेच भी नहीं सकते, क्योंकि इनकी तस्वीरें इंटरनेट पर हर जगह मौजूद हैं। चोरों के नज़रिए से, सबसे अच्छा यही होगा कि इन्हें तोड़ दिया जाए, कीमती धातुओं को पिघलाया जाए और रत्नों को अलग-अलग बेच दिया जाए।

चोरों ने अपने कब्जे में लिया महारानी यूजनी का मुकुट बाद में स्कूटर पर भागते समय गिरा दिया। इस मुकुट में सोने की आठ बाज, 1,354 ब्रिलियंट-कट हीरे, 1,136 रोज़-कट हीरे और 56 पन्ने हैं। संक्षेप में, यह बेचने के लिए अलग-अलग रत्नों का एक बड़ा भंडार है।

समय से ऊपर कुछ नहीं

लुव्र संग्रहालय के लिए, कोई भी चोरी एक बड़ा झटका है। यह उनकी इलेक्ट्रॉनिक और मानवीय सुरक्षा, दोनों पर सवाल उठाता है। पाँच सुरक्षा कर्मचारी पास में ही मौजूद थे जिन्होंने आगंतुकों की सुरक्षा के लिए काम किया और अलार्म बजते रहे, लेकिन पूरी चोरी सात मिनट के भीतर पूरी हो गई।

डकैतियों में समय का बहुत महत्व होता है।

2019 में, कलाकार मौरिज़ियो कैटेलन का 18 कैरेट सोने का शौचालय, जिसका शीर्षक अमेरिका (2016) था, इंग्लैंड के ब्लेनहेम पैलेस से चोरी हो गया था। इसे साढ़े पाँच मिनट में चुरा लिया गया था। इसका वज़न 98 किलोग्राम था और यह पूरी तरह से काम कर रहा था।

दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि जिन दो लोगों ने इसे चुराया था उन्होंने तेज़ी और कुशलता से काम किया। हालांकि वह लोग बाद में पकड़े गए और उन्होंने जेल की सज़ा काटी।

चोरी के समय, सोने के बुलियन के रूप में इसकी अनुमानित कीमत 60 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर थी।

वान गॉग की पेंटिंग ‘द पार्सोनेज गार्डन एट न्यूनेन इन स्प्रिंग’’ (1884) नीदरलैंड के सिंगर लारेन संग्रहालय से 2020 में कोविड के कारण बंद होने के दौरान चोरी हो गई थी। डच कला जासूस आर्थर ब्रांड द्वारा की गई जाँच के बाद इसे 2023 के अंत में बरामद किया गया।

ऑकलैंड के अंतरराष्ट्रीय कला केंद्र से 2017 में गॉटफ्रीड लिंडौएर की दो पेंटिंग्स की चोरी को अंजाम देने में बस कुछ ही मिनट लगे थे। चोरों ने नीलामी घर की सामने की खिड़की पर धावा बोला, जहाँ 10 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मूल्य की पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई थीं। ये पेंटिंग्स पाँच साल बाद एक बिचौलिए के ज़रिए मामूली नुकसान के साथ बरामद की गईं।

चोरी हुई पेंटिंग की बरामदगी

विक्टोरिया की राष्ट्रीय गैलरी से पिकासो की पेंटिंग ‘वीपिंग वुमन’ (1937) को 1986 में चुरा लिया था। चोरी के दो दिन बाद ही पता चला कि वह गायब है।

यह पेंटिंग चोरी होने के लगभग दो हफ़्ते बाद बरामद हुई। यह पेंटिंग गैलरी के कर्मचारियों को स्पेंसर स्ट्रीट रेलवे स्टेशन के एक लॉकर में जमा करने के लिए छोड़ दी गई थी। चोरी का मकसद विक्टोरियन कलाकारों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता की कमी को उजागर करना था, लेकिन चोरों की असली पहचान एक रहस्य बनी हुई है।

वर्ष 1986 में, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के न्यू नॉर्सिया स्थित बेनेडिक्टिन मठ की गैलरी से धार्मिक विषयों पर आधारित 26 पेंटिंग चोरी हो गईं।

चोरों की योजनाएँ बहुत खराब थीं। उन्होंने यह नहीं सोचा था कि तीन आदमी और पेंटिंग्स का ढेर एक डिब्बे में नहीं समा सकता। पेंटिंग्स को उनके फ्रेम से इस तरह अलग किया गया था, मानो उन्हें काट दिया गया हो। एक पेंटिंग पूरी तरह से नष्ट हो गई थी। चोरों को पकड़ लिया गया और उन पर आरोप लगाए गए।

चोर अब कहाँ जाएगा?

चोरी डकैतियों से वस्तुओं की बरामदगी कम होती है। कोई संख्या बताना असंभव है, लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर कलाकृतियों की बरामदगी संभवतः 10 प्रतिशत से भी कम है।

पेंटिंग्स को बेचना ज़्यादा मुश्किल होता है – उनका भौतिक स्वरूप इस हद तक नहीं बदला जा सकता कि वे पहचान में ही न आएँ।

हालाँकि, सोने के शौचालय या रत्नों जैसी वस्तुओं के मामले में, कीमती सामग्रियों और रत्नों का पुनः उपयोग किया जा सकता है। नेपोलियन के रत्न बरामद होंगे या नहीं, यह तो समय ही बताएगा।

मोनालिसा (1503), जो निस्संदेह लुव्र का मुख्य आकर्षण है, 1911 में चोरी हो गई थी और दो साल बाद बरामद हुई थी। चोर, विन्सेन्ज़ो पेरुग्गिया, लुव्र में काम करने वाला एक इतालवी कारीगर था और उसे बेचने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया था।

लुव्र में हुई यह नवीनतम चोरी सार्वजनिक संग्रहों में रखी वस्तुओं की भेद्यता को उजागर करती है। विडंबना यह है कि इन्हें अक्सर ऐसी संस्थाओं को सुरक्षित रखने के लिए उपहार में दिया जाता है।

वस्तुओं की रखवाली करने वालों को आमतौर पर न्यूनतम वेतन दिया जाता है, लेकिन उन पर एक बड़ी ज़िम्मेदारी होती है। जब बजट में कटौती की जाती है, तो अक्सर सुरक्षा कर्मचारियों की संख्या कम कर दी जाती है – जैसे कि पिछले हफ़्ते न्यू साउथ वेल्स की आर्ट गैलरी की घोषणा में कहा गया।

रविवार को चोरों को पता था कि वे क्या और क्यों चाहते थे। हम जानते हैं कि चुराए गए गहने फ्रांस के इतिहास का हिस्सा हैं और उनकी भरपाई नहीं की जा सकती। उनकी चोरी आगंतुकों को उनकी सुंदरता और शिल्प कौशल के साथ-साथ फ्रांस के इतिहास के संदर्भ में सामूहिक रूप से उनका अनुभव करने से वंचित करती है।

( द कन्वरसेशन )

मनीषा नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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