नयी दिल्ली, 17 अक्टूबर (भाषा) भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने सभी खाद्य व्यवसाय संचालकों को अपने लेबलिंग और विज्ञापनों में ‘ओआरएस’ (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) शब्द का इस्तेमाल तुरंत बंद करने का निर्देश दिया है। उन्होंने इस तरह की गतिविधियों को उपभोक्ताओं के लिए भ्रामक बताया है।
खाद्य सुरक्षा नियामक ने अपने 14 अक्टूबर के आदेश में स्पष्ट किया कि ट्रेडमार्क वाले नामों में या किसी भी खाद्य उत्पाद के नामकरण में ‘ओआरएस’ शब्द का प्रयोग खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 का उल्लंघन है।
नवीनतम आदेश जुलाई 2022 और फरवरी 2024 में जारी किए गए पहले के निर्देशों को वापस लेता है, जिसमें खाद्य लेबल पर ‘ओआरएस’ शब्द के इस्तेमाल की अनुमति दी गई थी, बशर्ते कि यह घोषणा या चेतावनी दी जाए कि ‘‘उत्पाद डब्ल्यूएचओ द्वारा अनुशंसित ओआरएस फॉर्मूला नहीं है।’’
मामले की समीक्षा के बाद, एफएसएसएआई ने निष्कर्ष निकाला कि इस तरह की गतिविधियां ‘‘झूठे, भ्रामक, अस्पष्ट और त्रुटिपूर्ण नामों या लेबल घोषणाओं’’ के माध्यम से उपभोक्ताओं को गुमराह कर रही हैं और अधिनियम का उल्लंघन हैं।
नियामक ने कहा कि अब इस शब्द का प्रयोग गलत ब्रांडिंग और भ्रामक माना जाएगा और एफएसएसएआई अधिनियम 2006 के तहत दंडनीय होगा।
एफएसएसएआई के आदेश में कहा गया है, ‘‘… सभी खाद्य व्यवसाय संचालकों को निर्देश दिया जाता है कि वे अपने खाद्य उत्पादों से ‘ओआरएस’ शब्द को हटा दें, चाहे वह एक स्वतंत्र शब्द के रूप में इस्तेमाल किया गया हो या किसी उपसर्ग या प्रत्यय के रूप में या उत्पाद के नाम में उपसर्ग या प्रत्यय वाले ट्रेडमार्क के हिस्से के रूप में इस्तेमाल किया गया हो। साथ ही, खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 और उसके तहत बनाए गए नियमों के तहत निर्धारित लेबलिंग और विज्ञापन आवश्यकताओं का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें।’’
हालांकि, ओआरएस के विकल्प उत्पादों के भ्रामक विज्ञापन और विपणन के संबंध में धारा 6(5) के तहत जारी आठ अप्रैल, 2022 का निर्देश अभी भी प्रभावी है।
भाषा राजेश राजेश रमण
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