मुंबई, 15 अक्टूबर (भाषा) चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में 56 प्रतिशत नियोक्ताओं ने अपना कार्यबल बढ़ाने की मंशा जताई है। यह जानकारी बुधवार को जारी टीमलीज सर्विसेज रोजगार परिदृश्य रिपोर्ट में दी गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, 27 प्रतिशत नियोक्ता अपने कार्यबल की मौजूदा स्थिति को ही बनाए रखना चाहते हैं जबकि 17 प्रतिशत संगठन कर्मचारियों की संख्या में कटौती की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
रिपोर्ट कहती है कि वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में ई-कॉमर्स एवं प्रौद्योगिकी स्टार्टअप, लॉजिस्टिक तथा खुदरा क्षेत्र में भर्ती की सबसे अधिक मांग देखने को मिल रही है। इन क्षेत्रों में अनुमानित शुद्ध रोजगार परिदृश्य (एनईसी) क्रमशः 11.3 प्रतिशत, 10.8 प्रतिशत और 8.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
वाहन, रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले उत्पाद (एफएमसीजी) और इलेक्ट्रिक वाहन ढांचा क्षेत्रों में भी पीएलआई और ईएमपीएस जैसी सरकारी नीतिगत प्रोत्साहन योजनाओं, स्थानीय उत्पादन और घरेलू मांग के बल पर स्थिर विस्तार हो रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी कंपनियां इस भर्ती गति का नेतृत्व कर रही हैं, जबकि मझोले एवं लघु उद्यम सतर्क और ‘रिटर्न-फर्स्ट’ रणनीति अपना रहे हैं।
सर्वेक्षण में पाया गया कि भर्तियों के दौरान संवाद कौशल (89 प्रतिशत), बुनियादी कंप्यूटर दक्षता (81 प्रतिशत) और विश्लेषणात्मक क्षमता (78 प्रतिशत) जैसी क्षमताओं की सबसे अधिक मांग है।
भर्ती की मंशा रखने के मामले में बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई अग्रणी शहर हैं जहां पर प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों का दबदबा है।
टीमलीज सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बालासुब्रमण्यन ए. ने कहा, ‘‘भारत का कार्यबल अब लक्षित और कौशल-आधारित रणनीतियों की ओर बढ़ रहा है। अब 61 प्रतिशत नियोक्ता चयनात्मक और प्रदर्शन-आधारित भर्ती दृष्टिकोण अपना रहे हैं।’’
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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