मुंबई, 15 अक्टूबर (भाषा) कृषि मंत्री दत्तात्रेय भराणे ने बुधवार को बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने विदेश अध्ययन दौरे के लिए किसानों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को एक लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये करने का फैसला किया है।
यहां एक बयान में, भराणे ने कहा कि इस फैसले का उद्देश्य किसानों को अन्य देशों में व्यापक रूप से प्रचलित उन्नत वैश्विक कृषि पद्धतियों को सीखने और अपनाने में मदद करना है।
किसानों के लिए विदेशी अध्ययन दौरे की सहायता राशि में 13 साल बाद संशोधन किया गया है।
मंत्री ने कहा, ‘‘वर्ष 2012 से यात्रा, आवास और विदेशी मुद्रा की लागत में वृद्धि के कारण एक लाख रुपये की मौजूदा सीमा अपर्याप्त थी। इसलिए, किसानों को (इन दौरों के दौरान) आधुनिक तकनीकों का अध्ययन करने और उन्हें अपने खेतों में लागू करने की अनुमति देने के लिए सहायता को बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दिया गया है।’’
कृषि विभाग द्वारा इस आशय का एक सरकारी प्रस्ताव (जीआर) जारी किया गया है। पुणे स्थित कृषि आयुक्तालय के माध्यम से कार्यान्वित सरकार द्वारा प्रायोजित यह योजना, किसानों को कृषि मशीनीकरण, सिंचाई, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन में वैश्विक रुझानों को समझने के लिए विदेश अध्ययन यात्राओं की सुविधा प्रदान करती है।
संशोधित दिशानिर्देशों के तहत, विदेश में अध्ययन यात्रा करने वाले किसानों को यात्रा व्यय का 50 प्रतिशत या अधिकतम दो लाख रुपये, जो भी कम हो, प्राप्त होंगे।
वित्त वर्ष 2004-05 से संचालित इस योजना ने अब तक किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और नवाचारों का अध्ययन करने के लिए अमेरिका, इज़राइल, जापान, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड, फ्रांस और थाइलैंड जैसे देशों की यात्रा करने में सक्षम बनाया है।
भराणे ने कहा कि बढ़ी हुई सहायता से किसानों को बेहतर अनुभव प्राप्त करने और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करने में मदद मिलेगी।
भाषा राजेश राजेश अजय
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