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Sunday, 22 March, 2026
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परमाणु ऊर्जा क्षमता में वृद्धि को कानून में बदलाव, यूरेनियम उत्पादन बढ़ाने समेत कई उपायों की सिफारिश

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नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) सरकार की एक समिति ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विधायी संशोधनों से लेकर देश में यूरेनियम उत्पादन बढ़ाने समेत कई उपायों की सिफारिश की है।

ये उपाय न केवल परमाणु क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करेंगे, बल्कि ऐसी परियोजनाओं की स्थापना के लिए आवश्यक मंजूरी में तेजी लाने में भी मदद करेंगे।

विद्युत मंत्रालय ने फरवरी में ‘2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रूपरेखा तैयार करने को लेकर एक समिति का गठन किया था।

समिति ने 2047 तक 100 गीगावाट का लक्ष्य हासिल करने के लिए सभी पहलुओं पर कई दौर की चर्चा की है और लक्ष्य के सामने आने वाली चुनौतियों की पहचान करने के साथ उन्हें कम करने के लिए आवश्यक उपायों की सिफारिश की है।

देश में वर्तमान में स्थापित परमाणु ऊर्जा क्षमता 8.88 गीगावाट है।

समिति का अनुमान है कि 100 गीगावाट क्षमता प्राप्त करने के लिए 19 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी।

परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 (सीएलएनडीए) में संशोधन, आवश्यक निजी पूंजी लाने और आपूर्तिकर्ताओं एवं संभावित निवेशकों की जोखिम धारणा को कम करने के लिए आवश्यक होंगे।

परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 वर्तमान में परमाणु परियोजनाओं में निजी क्षेत्र और यहां तक कि राज्य सरकारों की भागीदारी की भी अनुमति नहीं देता है। इसे परमाणु ऊर्जा उत्पादन में कड़े सुरक्षा और संरक्षण उपायों की आवश्यकता के कारण संभवत: जरूरी माना गया था।

इसके अलावा, आपूर्तिकर्ता और संभावित संचालक परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 के कुछ प्रावधानों को लेकर आशंकित हैं।

वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट का लक्ष्य हासिल करने के लिए 22 साल में मौजूदा क्षमता का 10 गुना से अधिक बढ़ाने यानी प्रति वर्ष लगभग 4.14 गीगावाट की औसत क्षमता वृद्धि की जरूरत है।

साथ ही समय पर लक्ष्य पूरा करने के लिए भारी मात्रा में यूरेनियम आपूर्ति सुनिश्चित करने की भी आवश्यकता होगी। वर्तमान में 2.4 गीगावाट यूरेनियम की आवश्यकता घरेलू स्रोतों से पूरी की जाती है और शेष आयात किया जाता है।

यह माना जाता है कि घरेलू यूरेनियम खनन और उसे यूरेनियम अयस्क सांद्र (यूओसी, जिसे ‘येलो केक’ भी कहा जाता है) में बदलने के लिए प्रसंस्करण की लागत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी कीमत की तुलना में लगभग तीन से चार गुना अधिक है। इसका मुख्य कारण भारत में आमतौर पर पाए जाने वाले अयस्क की खराब गुणवत्ता है।

हालांकि, दुनिया भर में परमाणु ऊर्जा के लिए बढ़ते दबाव के कारण अंतरराष्ट्रीय यूरेनियम की कीमतें बढ़ सकती हैं।

सरकार विस्तार को सुगम बनाने के लिए यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लि. (यूसीआईएल) में अतिरिक्त इक्विटी निवेश करने पर विचार कर सकती है।

समिति ने परियोजना में लगने वाले समय को कम करने का भी सुझाव दिया है।

सार्वजनिक क्षेत्र की एनटीपीसी, टाटा पावर और निजी क्षेत्र की नवीन जिंदल समूह पहले ही भारत में परमाणु परियोजनाएं स्थापित करने की अपनी योजनाओं की घोषणा कर चुके हैं।

वर्तमान में, एनटीपीसी राजस्थान में भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लि. (एनपीसीआईएल) के साथ एक संयुक्त उद्यम में लगभग 42,000 करोड़ रुपये के निवेश से एक परमाणु परियोजना स्थापित कर रही है।

भाषा रमण अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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