नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) सरकार ने सोमवार को ब्रह्मपुत्र बेसिन से 65 गीगावाट जलविद्युत उत्पादन क्षमता की निकासी के लिए 6.42 लाख करोड़ रुपये के निवेश से जुड़ी एक विस्तृत योजना पेश की। यह योजना देश की बढ़ती बिजली मांग और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के बनाए ‘ब्रह्मपुत्र बेसिन में जलविद्युत संयंत्रों से बिजली निकासी के लिए मास्टर प्लान’ के मुताबिक, वर्ष 2035 तक 12 उप-बेसिनों से बिजली निकालने के लिए 10,000 सर्किट किलोमीटर (सीकेएम) पारेषण लाइन, 30 गीगावोल्ट-एम्पीयर (जीवीए) परिवर्तन क्षमता और 12 गीगावाट उच्च-वोल्टेज प्रत्यक्ष धारा (एचवीडीसी) प्रणाली की जरूरत होगी।
सीईए ने बताया कि वर्ष 2035 के बाद अतिरिक्त 21,475 सीकेएम पारेषण लाइन (15,000 सीकेएम एचवीडीसी कॉरिडोर शामिल) और 68,175 मेगावोल्ट-एम्पीयर (एमवीए) की क्षमता जोड़ने की जरूरत होगी। इसकी अनुमानित लागत 4.51 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है।
बिजली सचिव पंकज अग्रवाल ने बयान में कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और इसकी बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने एवं दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए देश को टिकाऊ, किफायती और विश्वसनीय ऊर्जा स्रोत विकसित करने होंगे।
अग्रवाल ने कहा, “जलविद्युत का दोहन न केवल नवीकरणीय बिजली का एक प्रमुख स्रोत है, बल्कि यह एक अत्यधिक लचीला संसाधन भी है, जो नवीकरणीय और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के इष्टतम एकीकरण में मदद करता है।”
सीईए के चेयरमैन घनश्याम प्रसाद ने बताया कि ब्रह्मपुत्र बेसिन में चिह्नित विशाल जलविद्युत क्षमता को ध्यान में रखते हुए एक समग्र पारेषण प्रणाली मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इस योजना में 11,130 मेगावाट क्षमता वाले पंप भंडारण संयंत्रों (पीएसपी) को अंतर-राज्यीय तथा राज्यीय पारेषण प्रणालियों से जोड़ने का प्रस्ताव भी शामिल है।
प्रसाद ने कहा कि यह मास्टर प्लान ब्रह्मपुत्र बेसिन में जलविद्युत परियोजनाओं के डेवलपर को बिजली निकासी की दृष्टि से स्पष्टता देगा। पारेषण तत्वों को क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसियों द्वारा प्राप्त आवेदनों और तकनीकी जरूरतों के हिसाब से आगे बढ़ाया जाएगा।
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प्रेम अजय
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