(तस्वीर के साथ)
मुंबई, नौ अक्टूबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता दोनों बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लोगों की साझा प्रगति और समृद्धि का खाका (रोडमैप) है।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने व्यवसायों से ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने का आह्वान किया जहां वे वैश्विक मानक स्थापित कर सकें।
उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर के साथ कंपनियों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) के एक मंच को संबोधित करते हुए भारत की नीतिगत स्थिरता, अनुमान-योग्य नियमन और व्यापक मांग पर प्रकाश डाला।
उन्होंने ब्रिटिश कंपनियों को बुनियादी ढांचा, दवा, ऊर्जा और वित्त जैसे क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित भी किया।
मोदी ने कहा, ‘‘भारत की प्रतिभा एवं व्यापक स्तर और ब्रिटेन के शोध एवं विकास एवं विशेषज्ञता का संयोजन बेहतर परिणाम दे सकता है। लक्षित और समयबद्ध ढंग से आकांक्षाओं और महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए आपकी भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। मैं आपको भारत की वृद्धि गाथा में भागीदार बनने का निमंत्रण देता हूं।’’
उन्होंने कहा कि जुलाई में व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) पर हस्ताक्षर होने के साथ भारत एवं ब्रिटेन के संबंध और मजबूत हुए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘वर्तमान वैश्विक अस्थिरता के बीच इस वर्ष भारत-ब्रिटेन संबंधों में और मजबूती देखी गई है। इस वर्ष जुलाई में हमने सीईटीए पर हस्ताक्षर किए हैं… यह महज व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच साझा प्रगति, समृद्धि और साझा लोगों के लिए ‘रोडमैप’ है।’’
मोदी ने कहा, ‘‘बाजार पहुंच मिलने के साथ यह समझौता एमएसएमई को बढ़ावा देगा और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेगा।’’
ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कॉरपोरेट दिग्गजों से यह जानना चाहा कि दोनों देशों की सरकारें अवसरों का लाभ उठाने से रोकने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए क्या कर सकती हैं।
स्टार्मर ने कहा, ‘‘हम इस व्यापार समझौते से जुड़ी संभावनाओं को अधिकतम करने में आपका सहयोग करना चाहते हैं।’’
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जुलाई में व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद से व्यापार और निवेश में छह अरब पाउंड की वृद्धि हुई है।
स्टार्मर की भारत यात्रा दोनों देशों द्वारा एक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर करने के ढाई महीने बाद हो रही है। इस समझौते से बाजार पहुंच बढ़ेगी, शुल्कों में कटौती होगी और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होने की उम्मीद है।
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि फिलहाल 56 अरब डॉलर का भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय व्यापार 2030 की समयसीमा से पहले ही दोगुना हो सकता है।
जुलाई में प्रधानमंत्री मोदी की लंदन यात्रा के दौरान इस व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘आज दूरसंचार, एआई, बायोटेक, क्वांटम, सेमीकंडक्टर, साइबर और अंतरिक्ष क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाएं हैं। महत्वपूर्ण खनिजों, दुर्लभ मृदा, एपीआई जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में हमें सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ना चाहिए। भारत और ब्रिटेन के प्रमुख कारोबारियों को कुछ ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने के लिए काम करना चाहिए जहां हम मिलकर विश्व में अग्रणी बन सकें।’’
मोदी ने कहा, ‘‘चाहे वह फिनटेक हो, सेमी-कंडक्टर हो, हरित हाइड्रोजन हो या स्टार्टअप। भारत और ब्रिटेन मिलकर वैश्विक मानक स्थापित करें।’’
उन्होंने ब्रिटेन के नौ विश्वविद्यालयों द्वारा भारत में अपने परिसर (कैंपस) खोलने की घोषणा करते हुए कहा कि आने वाले समय में शिक्षा और उद्योग के बीच साझेदारी दोनों देशों की ‘नवाचार अर्थव्यवस्था’ को गति प्रदान करेगी।
मोदी ने सीईटीए के चार आयामों- वाणिज्य एवं अर्थव्यवस्था, शिक्षा एवं लोगों के बीच संबंध, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार और आकांक्षाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देशों की खुली एवं लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाएं साझेदारी की अपार संभावनाएं प्रदान करती हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘अब समय आ गया है कि अवसरों को ठोस साझेदारी में बदला जाए।’’
स्टार्मर ब्रिटेन के 125 प्रमुख व्यापारिक नेताओं, उद्यमियों और शिक्षाविदों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बुधवार सुबह दो दिवसीय यात्रा पर मुंबई पहुंचे थे।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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