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Friday, 20 March, 2026
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उच्चतम न्यायालय ने इंडियाबुल्स के खिलाफ शिकायतें बंद होने पर सरकार से मूल रिकॉर्ड रखने को कहा

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नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (अब सम्मान कैपिटल) के खिलाफ नियामकीय अनियमितता संबंधी शिकायतें बंद होने के मामले में कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय को मूल रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति उज्जल भुयान और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने जांच एजेंसियों की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू से यह पूछा कि इंडियाबुल्स के खिलाफ कितने मामलों को बंद किया गया।

पीठ ने कहा, ‘‘हम यह देखना चाहेंगे कि आपने कितने मामलों में इतनी उदारता दिखाई है कि सैकड़ों आपत्तियां बंद कर दी गईं।’’

इसके साथ ही पीठ ने कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय को निर्देश दिया कि 11 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर वरिष्ठ अधिकारी के साथ मूल रिकॉर्ड को न्यायालय के समक्ष रखे।

पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से यह स्पष्ट करने को कहा कि कंपनी के खिलाफ धनशोधन के आरोपों पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के रुख को लेकर उसकी क्या स्थिति है। इसके अलावा उठाए गए कदमों के बारे में भी बताने के लिए कहा गया है।

यह सुनवाई गैर-सरकारी संगठन ‘सिटिजंस व्हिसल ब्लोअर फोरम’ की याचिका पर हुई जिसमें इंडियाबुल्स पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।

वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे, मुकुल रोहतगी और अभिषेक सिंघवी ने कंपनी और उसके प्रवर्तकों की तरफ से कहा कि जांच एजेंसियों ने मामले में कोई दोष नहीं पाया है और यह एनजीओ एक ‘ब्लैकमेलर’ की तरह काम कर रहा है।

वहीं, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि इंडियाबुल्स ने बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी, धनशोधन और रियल एस्टेट में अनियमितताएं की हैं।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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