(राजेश राय)
दोहा, आठ अक्टूबर (भाषा) केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि देश में नवाचार, अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) कानूनों में बदलाव के लिए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय परामर्श पत्र जारी करेगा।
उन्होंने कहा कि हालांकि ऐसी रणनीतियों की अनुमति नहीं दी जाएगी जिनसे कंपनियां नियमों का गलत फायदा उठाकर अपने पेटेंट को अनावश्यक रूप से बढ़ाती रहें।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा, ‘‘ मैं अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों कंपनियों के साथ बातचीत कर रहा हूं ताकि यह देखा जा सके कि हम अपने बौद्धिक संपदा अधिकारों विशेष रूप से पेटेंट को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम व्यवहार के साथ कैसे संरेखित कर सकते हैं….’’
उन्होंने कहा, हालांकि, इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पेटेंट को अनावश्यक रूप से बढ़ाया न जा सके।
यह पूछे जाने पर कि मंत्रालय देश के आईपीआर कानूनों में किस तरह के संशोधनों पर विचार कर रहा है उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ यह एक सीमारेखा है। हम इसकी अनुमति नहीं देंगे। इसके अलावा अगर कुछ बदलाव अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भारत में नवोन्मेषण और अनुसंधान एवं विकास के लिए प्रोत्साहित करते हैं तो हम इसका स्वागत करेंगे।’’
मंत्रालय ने पहले ही पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, भौगोलिक संकेत और डिजाइन सहित आईपीआर दाखिल करने एवं प्रदान करने को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय किए हैं।
संशोधन के लिए मंत्रालय के विधेयक लाने पर विचार करने के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘‘ हम विचार-विमर्श के लिए परामर्श पत्र लाएंगे। यह रातोंरात होने वाला काम नहीं है। इसमें समय लगेगा। यह कारोबार को आसान बनाने और भारत में नवोन्मेषण, शोध एवं विकास की संस्कृति को बढ़ाने की दिशा में भी एक कदम है।’’
देश में बौद्धिक संपदा परिवेश को बढ़ाने के लिए सरकार ने 2016 में राष्ट्रीय आईपीआर नीति पेश की थी। इसमें सभी आईपीआर को एक एकल दृष्टिकोण दस्तावेज में शामिल किया गया जिससे बौद्धिक संपदा कानूनों के कार्यान्वयन, निगरानी एवं समीक्षा के लिए एक संस्थागत तंत्र स्थापित हुआ।
बौद्धिक संपदा अधिकारों के लिए आवेदनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और बौद्धिक संपदा कार्यालयों को भी क्षमता निर्माण के संदर्भ में नया रूप दिया जा रहा है। साथ ही अधिक परीक्षकों की भर्ती की गई है और उन्हें पेटेंट के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
एसईजेड अधिनियम में संशोधन की योजना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इसपर चर्चा जारी है।
एसईजेड (विशेष आर्थिक क्षेत्र) इकाइयां घरेलू शुल्क क्षेत्रों में शुल्क-मुक्त आधार पर माल बेचने की अनुमति की मांग कर रही हैं।
गोयल ने कहा, ‘‘ यदि वे एसईजेड इकाइयों से प्राप्त कर सकें, तो हम आयात में कटौती कर सकते हैं। इससे रोजगार सृजन में भी मदद मिलेगी।’’
पीएलआई (उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन) योजना के तहत राजकोषीय प्रोत्साहनों के कम वितरण पर मंत्री ने कहा कि यह स्वाभाविक है कि शुरुआती वितरण कम होगा, क्योंकि इसे इसी तरह तैयार किया गया है।
गोयल कतर के नेताओं और कारोबारियों से मिलने और द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा देने के उपायों पर चर्चा करने के लिए दो दिन की आधिकारिक यात्रा पर यहां आए हैं। वह एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।
भाषा निहारिका अजय
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