scorecardresearch
Sunday, 8 March, 2026
होमविदेशक्या साने ताकाइची जापान की मार्गरेट थैचर साबित होंगी?

क्या साने ताकाइची जापान की मार्गरेट थैचर साबित होंगी?

Text Size:

(सेबेस्टियन मास्लो, तोक्यो विश्वविद्यालय)

तोक्यो, छह अक्टूबर (द कन्वरसेशन) जापान में लंबे समय से सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) ने ‘#चेंजएलडीपी’ नारे के तहत साने ताकाइची को अपना नया नेता चुना है। ‘डाइट’ (जापानी संसद) के निचले सदन में इस महीने के अंत में होने वाले मतदान में जरूरी सदस्यों का समर्थन हासिल करने पर साने के जापान की अगली प्रधानमंत्री बनने की उम्मीद है। इसी के साथ वह देश की पहली महिला प्रधानमंत्री होंगी।

पहली नजर में यह घटनाक्रम ऐतिहासिक लगता है। साने न सिर्फ एलडीपी की नेता चुनी जाने वाली पहली महिला हैं, बल्कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के काल की उन चुनिंदा नेताओं में भी शामिल हैं, जिन्होंने कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि न होने के बावजूद सियासी जगत में ऊंचा मुकाम हासिल किया। पुरुष प्रधान राजनीतिक संस्कृति में उनका उदय लंबे समय से अपेक्षित बदलाव का संकेत देता प्रतीत होता है। लैंगिक असमानता के लिए लंबे समय से आलोचना झेल रहे जापान में यह प्रगति का स्पष्ट संकेत है।

हालांकि, हकीकत में साने का उदय पुराने ढर्रे की राजनीति की ओर वापसी को दर्शाता है। उनके पूर्ववर्ती, शिगेरु इशिबा ने चुनावों में मिली हार के बाद महज एक साल में पद से इस्तीफा दे दिया था। ये हार सिर्फ उनकी वजह से नहीं थीं। इशिबा ने यूनिफिकेशन चर्च से संबंधों को लेकर उठे सवाल और भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों के बाद एलडीपी में सुधार का संकल्प लिया था, लेकिन उन्हें कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ा।

जैसे ही पार्टी के पुराने गुट फिर से मजबूत स्थिति में उभरने लगे, वरिष्ठ नेता साने की दावेदारी के पीछे लामबंद हो गए। साने ने पार्टी के पुराने नेतृत्व के सत्ता के केंद्र में रहने का संकेत दिया है, जिससे अतीत में घोटालों में शामिल लोगों को जवाबदेह ठहराने के प्रयासों को झटका लगा है।

साने की जीत इस बात की ओर इशारा करती है कि एलडीपी संकट के दौर से गुजर रही है। हाल के महीनों में एलडीपी को अपने मतदाता सैनसेतो जैसी नयी दक्षिणपंथी पार्टियों के हाथों गंवाने पड़े हैं। पारंपरिक मतदाताओं को अपने साथ जोड़े रखने के लिए पार्टी ने एक सख्त रूढ़िवादी रुख अपनाया है।

“संकट के दौर में सुविधाओं में इजाफा करने” की यह रणनीति नयी नहीं है। 1970 के दशक में वाम दलों के बढ़ते जनाधार को देखते हुए रूढ़िवादी पार्टियों ने सत्ता बरकरार रखने के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं पेश की थीं और पर्यावरण संबंधी नीतियां अपनाई थीं। आज, दक्षिणपंथी दलों से मिल रही चुनौतियों के बीच एलडीपी राष्ट्रवाद, आव्रजन विरोधी बयानबाजी और ऐतिहासिक संशोधनवाद का सहारा ले रही है।

खुद को सामाजिक रूढ़िवादी बताने वाली साने विवाहित जोड़ों को अलग-अलग उपनाम रखने की अनुमति देने का विरोध करती हैं और शाही सिंहासन पर महिलाओं के उत्तराधिकार के खिलाफ हैं। उन्होंने ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर की तारीफ की है। हालांकि, यह देखना अभी बाकी है कि उनका प्रधानमंत्री कार्यकाल भी थैचर जितना परिवर्तनकारी साबित होगा या नहीं।

दिवंगत प्रधानमंत्री शिंजो आबे की करीबी सहयोगी रह चुकी साने को व्यापक रूप से उन्हीं की राजनीतिक विरासत को आगे ले जाने वाली नेता माना जाता है। आर्थिक पहलू पर उन्होंने ‘आबेनॉमिक्स’ की विस्तारवादी राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों को जारी रखने का संकल्प लिया है, जिसमें राजकोषीय संयम के बजाय विकास को प्राथमिकता दी जाती है।

जापान का ऋण-जीडीपी अनुपात 260 फीसदी से अधिक होने के बीच साने ने इस संबंध में कोई स्पष्ट रुख जाहिर नहीं किया है कि वह परिवारों पर आर्थिक दबाव कम करने के लिए अपनी योजनाओं को किस तरह वित्तपोषित करेंगी।

राजनीतिक रूप से, वह शांतिवादी संविधान को संशोधित करके और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करके, “जापान को युद्धोत्तर शासन की गिरफ्त से निकालने” की आबे की परियोजना को साकार करना चाहती हैं।

विदेश नीति के मामले में साने पूर्व प्रधानमंत्री आबे के “स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र” के दृष्टिकोण का समर्थन करती हैं। वह अमेरिका और चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद (क्वाड) से गहन सहयोग की हिमायती हैं। क्वाड ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका के बीच एक कूटनीतिक साझेदारी है, जो एक स्थिर, शांतिपूर्ण, समृद्ध, समावेशी और लचीले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।

साने क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए क्षेत्रीय साझेदारों के बीच मजबूत संबंधों की भी वकालत करती हैं। चीन और उत्तर कोरिया के खिलाफ उनका आक्रामक रुख इसी एजेंडे की पुष्टि करता है। उन्होंने रक्षा खर्च बढ़ाने का संकल्प लिया है। मौजूदा समय में जापान का रक्षा बजट उसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 1.8 प्रतिशत है।

(द कन्वरसेशन) पारुल पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments