मुंबई, तीन अक्टूबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को देश से बाहर रहने वाले व्यक्तियों को विशेष रुपया वास्ट्रो खातों के जरिये कॉरपोरेट ऋण प्रतिभूतियों में निवेश करने की मंजूरी दे दी।
इससे पहले, ऐसी संस्थाओं को केवल ट्रेजरी बिलों समेत केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों में अपने खाते के अधिशेष रुपये का निवेश करने की मंजूरी थी।
आरबीआई ने कहा, ‘अब यह निर्णय लिया गया है कि इस शेष राशि को किसी भारतीय कंपनी द्वारा जारी गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर/बॉन्ड और वाणिज्यिक पत्रों में भी निवेश करने की अनुमति दी जाए।’
विशेष रुपया वास्ट्रो खाते (एसआरवीए) भारतीय रुपये में कारोबार के निपटान को बढ़ाने के लिए खोले गये खाते हैं।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि ये निवेश सामान्य मार्ग के तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के निवेश के लिए निर्दिष्ट निवेश-सीमा एवं प्रावधानों के अधीन होंगे। इसके अलावा इन पर अन्य शर्तें भी होंगी।
उसने कहा कि कॉरपोरेट ऋण में निवेश की अनुमति देने के नियमों में बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू है।
इस बीच, रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन (उधार और ऋण) विनियम, 2018 में शामिल बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) से संबंधित विनियमों को युक्तिसंगत बनाने के मसौदे की भी घोषणा की है।
इस मसौदे में उधारी सीमा को उधारकर्ता की वित्तीय क्षमता से जोड़ने और बाजार-निर्धारित ब्याज दरों पर ईसीबी जुटाने का प्रस्ताव जैसी विशेषताएं शामिल हैं।
इसमें अंतिम उपयोग की बंदिशों और न्यूनतम औसत परिपक्वता प्रावधानों को भी सरल बनाने का प्रस्ताव है।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि ऋण प्रवाह के अवसर बढ़ाने के लिए ईसीबी लेनदेन के लिए पात्र उधारकर्ता और ऋणदाता आधार का विस्तार करने का प्रस्ताव है और अनुपालन दायित्वों को आसान बनाने के लिए रिपोर्टिंग शर्तों को सुगम बनाया जा रहा है।
इस कदम की घोषणा एक अक्टूबर को मौद्रिक नीति की द्विमासिक समीक्षा के बाद की गई थी। मसौदे पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया 24 अक्टूबर तक दी जा सकती है।
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