नयी दिल्ली, दो अक्टूबर (भाषा) सरकार ने धन आधारित ऑनलाइन गेमिंग नियमों के उल्लंघन को गैर-जमानती अपराध बनाने और उल्लंघन में मदद करने के लिए कंपनी के सभी कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराने का प्रस्ताव रखा है।
बृहस्पतिवार को जारी मसौदा नियमों के मुताबिक, किसी भी अधिकृत अधिकारी को किसी भी स्थान, चाहे वह भौतिक हो या डिजिटल, में प्रवेश करने और ऑनलाइन गेमिंग प्रोत्साहन एवं विनियमन (पीआरओजी) अधिनियम, 2025 के तहत किसी भी अपराधी या संदिग्ध व्यक्ति की बिना वारंट के तलाशी लेने और गिरफ्तार करने की अनुमति होगी।
इसमें प्रस्ताव किया गया है, ‘‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 में निहित प्रावधानों के बावजूद, धारा पांच और धारा सात के तहत अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे।’’
मसौदा नियमों के तहत, धारा पांच संस्थाओं को ऑनलाइन मनी गेम्स और ऑनलाइन मनी गेमिंग सेवाओं की पेशकश, सहायता, प्रोत्साहन या उनमें शामिल होने से रोकती है।
धारा सात बैंकों, वित्तीय संस्थानों या किसी अन्य व्यक्ति को किसी भी ऑनलाइन मनी गेमिंग सेवा के लिए वित्तीय लेनदेन की सुविधा प्रदान करने से रोकती है।
ये मसौदा नियम ऑनलाइन गेमिंग प्रोत्साहन एवं विनियमन अधिनियम की धारा 19 के तहत तैयार किए गए हैं। अधिनियम को राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद 22 अगस्त को अधिसूचित कर दिया गया था।
यह अधिनियम देश में ऑनलाइन मनी गेम्स और धन-आधारित गेमिंग सेवाओं के साथ उनके प्रचार पर भी प्रतिबंध लगाता है।
ये नियम अधिनियम के तहत उपकरणों सहित संदिग्ध स्थानों की तलाशी लेने के लिए अधिकृत अधिकारियों या व्यक्तियों को किसी भी प्रकार के मुकदमे या कानूनी कार्यवाही से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मसौदा नियमों पर 31 अक्टूबर तक प्रतिक्रिया और टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।
भाषा रमण प्रेम
प्रेम
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
