सिंगापुर, दो अक्टूबर (भाषा) भारत के पूर्व जी-20 शेरपा अमिताभ कांत ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारतीय राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को शहरीकरण, मुक्त उद्यम को लेकर सिंगापुर के दृष्टिकोण का अनुकरण करने के साथ अधिक उदारीकरण को बढ़ावा देना चाहिए।
नीति आयोग के पूर्व सीईओ ने कहा, ‘‘भारत एक बहुत बड़ा देश है। आने वाले समय को भारत का दशक और भारत की सदी बनाने के निरंतर प्रयासों के लिए, देश के हरेक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश को अगला सिंगापुर यानी गतिशील, नवोन्मेषी और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनने की महत्वाकांक्षा रखनी चाहिए।’’
कांत ने सिंगापुर राष्ट्रीय विश्वविद्यालय की शोध संस्था ‘दक्षिण एशियाई अध्ययन संस्थान’ (आईएसएएस) द्वारा आयोजित ‘बंटी हुई दुनिया में भारत का उदय: अवसर और चुनौतियां’ विषय पर पहले आईएसएएस-खट्टर परिवार व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए यह बात कही।
उन्होंने 1.4 अरब लोगों वाले देश में हो रही आर्थिक प्रगति और बुनियादी ढांचे के विकास की तीव्र गति का उल्लेख करते हुए कहा, ‘सिंगापुर इस यात्रा में एक महत्वपूर्ण भागीदार है।’
कांत ने दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी का जिक्र किया जिसमें आर्थिक सहयोग, कौशल, डिजिटलीकरण, पर्यावरण अनुकूल पहल, संपर्क, स्वास्थ्य सेवा, संस्कृति और रक्षा जैसे आठ क्षेत्र शामिल हैं।
कांत ने कहा, ‘‘यह एक आदर्श उदाहरण है कि दो देश किस तरह परस्पर लाभ के लिए अपनी शक्तियों का उपयोग कर सकते हैं।’’ उन्होंने सिंगापुर को भारत के वित्तीय क्षेत्र में सबसे बड़ा निवेशक बताया।
कांत ने कहा कि दोनों देशों के सहयोग में प्रौद्योगिकी, सीमापार भुगतान, ब्लॉकचेन और फिनटेक, हरित ऊर्जा विकास और व्यापार समझौतों एवं सरल कारोबारी नियमों के माध्यम से आर्थिक सुधार शामिल हैं।
उन्होंने एशियाई देशों से अपनी शक्तियों का उपयोग करने, कमियों को दूर करने और दुनिया के लिए समावेशी एवं सतत वृद्धि के मॉडल बनाने का भी आग्रह किया, जो एक अस्थिर आर्थिक और व्यापारिक माहौल का सामना कर रही है।
कांत ने कहा, ‘‘भारत के विकास पथ में वैश्विक दक्षिण के लिए कई सबक हैं। इसमें डिजिटल उपकरण नागरिकों को किस तरह सशक्त बनाते हैं, कैसे स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार किया जा सकता है, कैसे साहसिक सुधार विश्वास बहाल करते हैं, जैसे बिंदु शामिल हैं।’’
उन्होंने दक्षिण एशिया के संदर्भ में कहा, ‘‘यह इस क्षेत्र को प्रगति के एक महत्वपूर्ण इंजन के रूप में स्थापित करता है।’’ जटिल चुनौतियों के बावजूद दक्षिण एशिया मजबूत, नवोन्मेष और परिवर्तन क्षमता का प्रदर्शन जारी रखे हुए है।
कांत ने कहा, ‘‘हमारी विविधता, गतिशीलता और शिक्षा एवं प्रौद्योगिकी में निरंतर निवेश एक ऐसे युग का संकेत देते हैं जहां दक्षिण एशिया विश्व मंच पर एक तेजी से प्रभावशाली और अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।’’
भाषा रमण प्रेम
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