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मुंबई, एक अक्टूबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि जब तक किसी संस्था का पंजीकरण रद्द नहीं होता, वह अपना व्यवसाय जारी रख सकती है। यह टिप्पणी टाटा संस को सूचीबद्ध करने की समयसीमा बीत जाने और इस संबंध में उठ रहे सवालों के बीच आयी है।
केंद्रीय बैंक ने टाटा समूह की मूल कंपनी टाटा संस समेत कुछ कंपनियों को ‘अपर लेयर’ श्रेणी में डालते हुए 30 सितंबर तक सूचीबद्ध होने को कहा था। बाकी सभी संस्थाओं ने इस नियम का पालन कर लिया है लेकिन टाटा संस अभी तक सूचीबद्ध नहीं हुई है।
दरअसल टाटा संस ने सूचीबद्ध होने की अनिवार्यता से बचने के लिए पिछले वर्ष ‘प्रमुख निवेश कंपनी’ (सीआईसी) के अपने पंजीकरण को ‘सरेंडर’ करने की अर्जी दे दी थी। हालांकि आरबीआई ने अभी तक इस आवेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
आरबीआई गवर्नर से जब यह पूछा गया कि क्या टाटा संस को अपना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने से फिलहाल छूट दी गई है तो उन्होंने कहा, ‘‘जिस संस्था का पंजीकरण बना हुआ है, वह जब तक रद्द नहीं होता तब तक वह व्यवसाय करती रहेगी।’’
द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान मल्होत्रा ने यह भी कहा कि आरबीआई किसी विशेष संस्था पर टिप्पणी नहीं करता है।
बाजार में सूचीबद्ध होने पर टाटा संस को कई अतिरिक्त खुलासा एवं अनुपालन शर्तों का पालन करना होगा। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि विविध क्षेत्रों में फैले इस समूह के लिए ऐसी शर्तें पूरी करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
टाटा संस के सूचीबद्ध होने का सबसे बड़ा लाभ शापूरजी पल्लोनजी समूह को होगा, जिसकी इस कंपनी में 18 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है। फिलहाल वित्तीय दबाव से गुजर रहा यह समूह टाटा संस का सबसे बड़ा निजी शेयरधारक है।
इस बीच कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई समयसीमा बढ़ा सकता है और शर्तों के साथ पंजीकरण को ‘सरेंडर’ करने का प्रस्ताव स्वीकार कर सकता है।
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प्रेम रमण
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