नयी दिल्ली, 30 सितंबर (भाषा) केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कृषि वैज्ञानिकों से वैकल्पिक गन्ना किस्मों का विकास करने को कहा क्योंकि मौजूदा किस्म ‘लाल सड़न रोग’ (रेड रॉट डिजीज) की चपेट में आने लगी है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) को इस उद्देश्य के लिए एक अलग टीम गठित करने का भी निर्देश दिया गया है। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।
‘लाल सड़न रोग’ मुख्य रूप से गन्ने की फसल को प्रभावित करता है। इससे प्रभावित गन्ने के तनों पर लाल रंग के धब्बे, तनों और पत्तियों में सूखापन और गलन होने लगती है, गन्ने का रस कम निकलता है और स्वाद भी खराब हो जाता है।
चौहान ने यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘रोगों पर नियंत्रण एक गंभीर चुनौती है क्योंकि नई किस्में अक्सर नई बीमारियों का खतरा लेकर आती हैं।’’
चौहान ने कहा कि गन्ने की ‘सीओ 0238’ किस्म में शर्करा की मात्रा अच्छी है, लेकिन यह लाल सड़न रोग के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने वैकल्पिक किस्मों के विकास पर भी काम करने की जरूरत पर बल दिया।
गन्ने की इस किस्म को वर्ष 2009 में लाल सड़न रोग की प्रचलित प्रजातियों के प्रति मध्यम प्रतिरोधक क्षमता के साथ पेश किया गया था। इस वजह से उत्तर भारत के किसानों ने इसे तेजी से अपनाया।
हालांकि, वर्ष 2020 और वर्ष 2023 के बीच इस किस्म की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगी। खासकर अधिक घातक लाल सड़न रोग के उभरने और प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण ऐसा हुआ।
इस अवसर पर कृषि मंत्री ने जैव उत्पादों के महत्व पर भी बल देते हुए कहा कि एथेनॉल और शीरे के उपयोग सुस्थापित हैं, लेकिन किसानों का मुनाफा बढ़ाने के लिए नए मूल्यवर्धित उत्पाद विकसित करने की ज़रूरत है।
उन्होंने उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में मदद के लिए प्राकृतिक खेती की क्षमता पर भी जोर दिया।
चौहान ने चीनी मूल्य श्रृंखला से जुड़ी समस्याओं को स्वीकार करते हुए कहा कि भुगतान में देरी को लेकर किसानों की शिकायतें जायज हैं। उन्होंने कहा कि चीनी मिलों की अपनी समस्याएं हैं लेकिन भुगतान में देरी होने से किसानों को नुकसान होता है।
उन्होंने कृषि श्रमिकों की कमी पर भी प्रकाश डाला और गन्ने की कटाई में कम श्रमिकों की जरूरत के लिए मशीनीकरण में नवाचारों के साथ प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण का सुझाव भी दिया।
आईसीएआर के महानिदेशक और डेयरी सचिव एम एल जाट ने शोध के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान देने की जरूरत बताई। इनमें शोध प्राथमिकताओं को परिभाषित करना, शोध को आगे बढ़ाने के लिए विकासात्मक चुनौतियों की पहचान करना, उद्योग से संबंधित मुद्दों से निपटना और इस क्षेत्र को समर्थन देने के लिए नीतिगत कदमों की सिफारिश करना शामिल हैं।
आईसीएआर में फसल विज्ञान के उप महानिदेशक देवेंद्र कुमार यादव ने बताया कि गन्ने की किस्म सीओ 0238 का शुरुआत में किसानों ने स्वागत किया था, लेकिन बाद में इसका इस्तेमाल एकल-फसल खेती के रूप में किया गया।
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि विकल्प मौजूद हैं लेकिन नई किस्में अपनाने में समय लगता है। प्रत्येक किस्म का रोग, कीट प्रतिरोध और उपज की निगरानी के लिए तीन साल तक परीक्षण किया जाता है।’’
भाषा राजेश राजेश प्रेम
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