नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) वाणिज्य मंत्रालय की जांच इकाई डीजीटीआर ने चीन से आयातित कुछ क्रेनों के आयात पर पांच साल के लिए डंपिंग-रोधी शुल्क लगाने की सिफारिश की है। इस कदम का उद्देश्य घरेलू उत्पादकों को सस्ते आयात से बचाना है।
व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) ने जांच में निष्कर्ष निकाला है कि उत्पाद को सामान्य मूल्य से कम कीमत पर भारत में निर्यात किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप डंपिंग हुई है।
डीजीटीआर ने एक अधिसूचना में कहा, ‘‘पांच साल की अवधि के लिए निश्चित डंपिंग-रोधी शुल्क…लगाने की सिफारिश की जाती है।’’
उत्पाद की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, प्राधिकरण का मानना है कि वस्तु के आयात मूल्य के सीआईएफ (लागत, बीमा, माल ढुलाई) मूल्य के प्रतिशत के रूप में डंपिंग-रोधी शुल्क की सिफरिश करना उचित होगा।
क्रेनों का उपयोग बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, सड़कों और पुलों, रिफाइनरियों और सीमेंट संयंत्रों जैसे परियोजना स्थलों पर सामान चढ़ाना/उतारना, सामग्री की आवाजाही के लिए किया जाता है।
डीजीटीआर शुल्क की सिफारिश करता है, जबकि वित्त मंत्रालय इसे लगाने का अंतिम निर्णय लेता है।
जांच इकाई ने दो अलग-अलग अधिसूचनाओं में कहा कि उसने चीन से आयातित कॉपर डेटा केबल और एथमब्यूटोल हाइड्रोक्लोराइड के आयात में कथित डंपिंग जांच शुरू की है। देश डंपिंग रोधी जांच यह निर्धारित करने के लिए करते हैं कि सस्ते आयात में वृद्धि के कारण घरेलू उद्योगों को नुकसान हुआ है या नहीं।
भारत ने चीन सहित विभिन्न देशों से सस्ते आयात से निपटने के लिए पहले ही कई उत्पादों पर डंपिंग रोधी शुल्क लगा दिया है।
भारत का चीन के साथ लगभग 100 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार घाटा है।
भाषा रमण अजय
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