(लक्ष्मी देवी ऐरे)
नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) नॉर्वे की प्रमुख उर्वरक कंपनी यारा इंटरनेशनल की भारतीय इकाई को इस साल विशेष उर्वरक आयात में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है। यह 140,000 टन तक पहुंचने की राह पर है जो पिछले साल की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक है।
कंपनी चीन की कड़ी निर्यात पाबंदियों से निपटने की कोशिश कर रही है जो अगले महीने से लागू होने वाली हैं। यारा 70-80 प्रतिशत विशेष उर्वरक चीन से आयात करती है।
यारा इंटरनेशनल की भारतीय इकाई ने जनवरी से सितंबर तक 100,000-120,000 टन विशेष उर्वरकों का आयात किया है और इस वर्ष यह 135,000-140,000 टन वार्षिक स्तर को छूने की ओर अग्रसर है।
यारा दक्षिण एशिया के प्रबंध निदेशक (एमडी) संजीव कंवर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए विशेष साक्षात्कार में बताया कि 2025 में कंपनी के विशेष उर्वरक आयात में वृद्धि होने की संभावना है, क्योंकि किसानों द्वारा लाभदायक फल व सब्जी फसलों की ओर रुख करने से बागवानी की मांग में तेजी आएगी।
घुलनशील उर्वरक उद्योग संघ के अनुसार, चीनी विशेष उर्वरक निर्यात की अस्थायी बहाली से अल्पकालिक राहत मिली है क्योंकि चीन अगले महीने से निरीक्षणों में वृद्धि और खेप में देरी के माध्यम से निर्यात नियंत्रण को कड़ा करने की योजना बना रहा है।
कंवर ने कहा, ‘‘ करीब 70 प्रतिशत विशेष उर्वरक अब हमारे अपने नॉर्वे स्थित संयंत्रों से आ रहे हैं, जिनमें कैल्शियम नाइट्रेट भी शामिल है। शेष पश्चिम एशिया के आपूर्तिकर्ताओं से आ रहे हैं। इससे आपूर्ति श्रृंखला का विस्तार हो रहा है, लेकिन भारत के 80 प्रतिशत आयात-निर्भर बाजार पर लागत का बोझ नहीं पड़ रहा है।’’
उन्होंने बताया कि कंपनी का विशेष उर्वरक आयात 2025 में बढ़ने वाला है।
कंवर ने कहा, ‘‘ यह पिछले साल से अधिक होगा। मुझे लगता है कि यह करीब 25 प्रतिशत अधिक होगा क्योंकि बाजार तेजी से बढ़ रहा है। विशेष उर्वरक बाजार इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि किसान फलों व सब्जियों का अधिक रुख कर रहे हैं। ऐसा केवल इसलिए नहीं है क्योंकि इन्हें उगाना अच्छा है, बल्कि इसलिए भी कि ये अधिक मुनाफे वाले हैं।’’
उन्होंने साथ ही कहा, ‘‘ इस वर्ष विशेष उर्वरक व्यवसाय में करीब 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि होनी चाहिए। हम प्रत्यक्ष रूप से किसानों तक पहुंच रहे हैं और लगभग 40,000 से 50,000 किसान बैठकें आयोजित कर रहे हैं। यारा फसल कार्यक्रम की क्षमता दिखाने के लिए हम करीब 4,000 से 5,000 प्रस्तुतियां करते हैं।’’
नॉर्वे से भारत के 70 प्रतिशत उर्वरक आयात की आपूर्ति करने वाली यारा ने भारत आने वाले जल-घुलनशील उर्वरकों के लिए चीन में एक विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने की योजना बनाई थी, लेकिन भू-राजनीतिक तनावों के कारण इसे स्थगित कर दिया गया।
आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा के लिए स्वामित्व वाली प्रौद्योगिकी में निवेश करने या बेल्जियम या मोरक्को जैसे देशों के साथ सौदे करने के बारे में पूछे जाने पर कंवर ने ऐसे किसी भी कदम से इनकार किया।
उन्होंने कहा, ‘‘ नहीं, बिल्कुल नहीं। जैसा कि मैंने बताया, हमारी 70 प्रतिशत आपूर्ति यारा प्रणाली के अंतर्गत हमारे अपने उत्पादन से आ रही है। शेष 30 प्रतिशत के लिए हमने दुनिया भर के विभिन्न उत्पादकों के साथ दीर्घकालिक व्यवस्था की है।’’
कंपनी को भारत के सक्रिय सब्सिडी ढांचे से लाभ मिलता है। इससे 2019 से कोई देरी नहीं हुई है जिससे यूरिया की कीमतें स्थिर रहती हैं।
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा
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