नयी दिल्ली, 23 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने समुद्र एवं नदी किनारे की रेत में मौजूद खनिजों (बीएसएम) के निर्यात पर लगी पाबंदियों के खिलाफ दायर याचिका खारिज करने वाले आदेश को मंगलवार को बरकरार रखा।
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने 25 जुलाई, 2019 को बीएसएम उत्पादक संघ की तरफ से दायर याचिका खारिज कर दी थी।
यह याचिका 21 अगस्त, 2018 की उस अधिसूचना के खिलाफ दायर की गई थी जिसमें समुद्र एवं नदी किनारे की रेत में पाए जाने वाले खनिजों का निर्यात स्टेट ट्रेडिंग एंटरप्राइज और इंडियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड (आईआरईएल) के जरिये करने का प्रावधान किया गया था।
अधिसूचना में कहा गया था कि ये दोनों संस्थाएं बीएसएम तत्वों के निर्यात के लिए केंद्रीकृत एजेंट के रूप में काम करेंगी।
याचिका में दावा किया गया था कि अधिसूचना से आईआरईएल को प्रमुख स्थिति मिल गई है और बाजार में समान अवसरों का संतुलन बिगड़ा है।
एनसीएलएटी ने कहा कि यह अधिसूचना याचिकाकर्ताओं को विदेशी खरीदारों के साथ व्यापार करने से रोकती नहीं है और केवल यह तय करती है कि निर्यात आईआरईएल के जरिये किया जाए।
अपीलीय न्यायाधिकरण ने यह भी साफ किया कि सीसीआई अधिनियम की धारा-चार इस मामले में लागू नहीं होती, क्योंकि यह सरकारी संस्थाओं की सार्वभौमिक गतिविधियों पर लागू नहीं होती है जिसमें परमाणु ऊर्जा, मुद्रा, रक्षा और अंतरिक्ष से संबंधित कार्य शामिल हैं।
बीएसएम में इल्मेनाइट, रुटाइल, गार्नेट, मोनाज़ाइट, जिरकन, सिलीमेनाइट और ल्यूकोक्सीन जैसे खनिज आते हैं। इनका उपयोग सैंड ब्लास्टिंग, वेल्डिंग फ्लक्स, रेफ्रैक्टरी निर्माण, रेयर अर्थ कंपोनेंट्स निष्कर्षण और परमाणु ऊर्जा में होता है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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