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Saturday, 14 March, 2026
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एआई के नैतिक उपयोग के लिए वैश्विक मानक तय करने पर चर्चा जारीः उपभोक्ता मामलों की सचिव

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नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने बुधवार को कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) के आम जिंदगी में तेजी से अपनी जगह बनाने के साथ उसके नैतिक उपयोग के लिए वैश्विक मानक तय करने को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के बीच विचार-विमर्श जारी है।

खरे ने कहा कि भारत के विशेषज्ञ भी इन अंतरराष्ट्रीय मानक-निर्धारण समितियों में शामिल हैं और जब एआई से संबंधित वैश्विक मानक तय हो जाएंगे तो उन्हें भारत समेत सभी देश अपनाएंगे।

उन्होंने उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 39 मानक पहले से मौजूद हैं और 45 और मानक बनाए जा रहे हैं।’’

यह सम्मेलन खुदरा और ई-कॉमर्स क्षेत्र में धोखाधड़ी और नकली सामान की रोकथाम में एआई के उपयोग पर आयोजित किया गया।

उपभोक्ता मामलों की सचिव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विद्युत-प्रौद्योगिकी आयोग (आईईसी) की मौजूदा बैठक में एआई के जिम्मेदार, समावेशी और नैतिक उपयोग पर मानक तैयार करने पर चर्चा हो रही है।

खरे ने कहा, ‘‘कई भारतीय विशेषज्ञ इन संगठनों का नेतृत्व कर रहे हैं और वैश्विक मानकों को आकार दे रहे हैं। इसके साथ ही सरकारों को उपभोक्ताओं को गुमराह और ठगा जाने से बचाने के लिये कानूनी ढांचे तैयार करने होंगे।’’

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि एआई के जरिये प्रचार-प्रसार और दुष्प्रचार फैलाने के उदाहरण ‘पूरी तरह अस्वीकार्य’ हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘एआई आज की दुनिया में एक बड़ी चुनौती है। यह इंसान की सोच और अनुमान लगाने की क्षमता से तेज और अधिक गहराई से काम करती है, और यह बात उपभोक्ता की जानकारी या उत्पादकता पर निर्भर नहीं है।’’

हालांकि, उन्होंने एआई के सकारात्मक पहलुओं को भी रेखांकित करते हुए कहा कि सोशल मीडिया मंच और सृजनात्मक नवाचार इसी पर आधारित हैं।

सम्मेलन में चर्चा के दौरान इस बात पर जोर रहा कि एआई जहां धोखाधड़ी की रोकथाम में मददगार हो सकती है, वहीं इसके अनुचित उपयोग से उपभोक्ता जोखिम में भी पड़ सकते हैं।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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