नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक ने बुधवार को कहा कि सरकार स्वच्छ इस्पात निर्माण प्रौद्योगिकी की स्वीकार्यता को बढ़ावा देने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए 5,000 करोड़ रुपये की योजना पर काम कर रही है।
मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने राष्ट्रीय राजधानी में ‘एफटी लाइव एनर्जी ट्रांजिशन समिट इंडिया’ के दौरान पीटीआई-भाषा से यह बात कही।
उन्होंने कहा, ‘‘सतत इस्पात के लिए राष्ट्रीय मिशन का प्रस्ताव विचाराधीन है। यह 5,000 करोड़ रुपये की योजना है।’’
पौंड्रिक ने कहा कि इस योजना में देश के सभी इस्पात विनिर्माता शामिल होंगे, जिसमें 75-80 प्रतिशत धनराशि द्वितीयक क्षेत्र की कंपनियों के लिए निर्धारित की गई है।
उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य स्वच्छ प्रौद्योगिकियों और वैकल्पिक सामग्रियों के उपयोग को प्रोत्साहित करके इस्पात उत्पादन में कम कार्बन उत्सर्जन को बढ़ावा देना है।
उनकी यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत पेरिस समझौते पर हस्ताक्षरकर्ता है और इसका लक्ष्य शुद्ध-शून्य उत्सर्जन वाला देश बनना है।
पौंड्रिक ने कहा कि अगले कुछ महीनों में इस योजना के चालू होने की उम्मीद है।
योजना की व्याख्या करते हुए उन्होंने आगे कहा, ‘‘मूल रूप से, इस योजना का उद्देश्य यह है कि आप उत्सर्जन में कितनी कमी करते हैं, उसके आधार पर आपको प्रोत्साहन राशि मिलेगी… यदि आप अपने कार्बन उत्सर्जन को पिछले वर्ष की तुलना में कम करते हैं… तो हम प्रौद्योगिकी में सुधार की बात कर रहे हैं, लेकिन हम जिस ‘आउटपुट पैरामीटर’ को माप रहे हैं, वह है कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना।’’
इस्पात सबसे बड़े कार्बन उत्सर्जक उद्योगों में से एक है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, घरेलू इस्पात क्षेत्र भारत के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 12 प्रतिशत का योगदान देता है, जिसकी उत्सर्जन तीव्रता प्रति टन कच्चे इस्पात पर 2.55 टन सीओ2 है, जो वैश्विक औसत 1.9 टन सीओ2 से अधिक है।
भाषा अजय अजय
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