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Friday, 27 March, 2026
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व्यक्तिगत स्वास्थ्य, जीवन बीमा पॉलिसी मामले में कमीशन पर जीएसटी के लिए आईटीसी का लाभ नहीं

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नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने मंगलवार को कहा कि बीमा कंपनियां 22 सितंबर से व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा पॉलिसी के लिए कमीशन और ब्रोकरेज जैसे ‘इनपुट’ यानी कच्चे माल के लिए चुकाए गए जीएसटी पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा नहीं कर पाएंगी।

सीबीआईसी ने 22 सितंबर से नए जीएसटी स्लैब लागू होने पर विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं पर कराधान के बारे में स्पष्टीकरण देते हुए अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (एफएक्यू) की सूची जारी की है।

जीएसटी परिषद ने तीन सितंबर को अपनी बैठक में व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा पॉलिसी पर चुकाए गए प्रीमियम को जीएसटी से छूट देने का निर्णय लिया। फिलहाल इस पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता है। छूट 22 सितंबर से प्रभावी होगी।

इस सवाल के जवाब में कि बीमा कंपनियों की कौन सी ‘इनपुट’ सेवाएं जीएसटी से मुक्त हैं, सीबीआईसी ने कहा कि वर्तमान में, बीमा कंपनियां कमीशन, ब्रोकरेज और पुनर्बीमा जैसे कई इनपुट और इनपुट सेवाओं पर आईटीसी का लाभ उठा रही हैं।

सीबीआईसी ने कहा, ‘‘इन इनपुट सेवाओं में से, पुनर्बीमा सेवाओं को छूट दी जाएगी। अन्य कच्चे माल के मामले में इनपुट टैक्स क्रेडिट वापस ले लिया जाएगा। इसका कारण अंतिम उत्पाद सेवाओं को जीएसटी छूट दी जा रही है।’’

इसका मतलब यह है कि व्यक्तिगत बीमा पॉलिसी के मामले में कमीशन और ब्रोकरेज जैसे ‘इनपुट’ पर चुकाए गए कर, बीमा कंपनियों के लिए लागत होंगी, क्योंकि वे ऐसे करों को समायोजित नहीं कर पाएंगी।

सीबीआईसी ने यह भी स्पष्ट किया कि 7,500 रुपये प्रति कमरा प्रतिदिन से कम या उसके बराबर मूल्य वाली आवास इकाइयां प्रदान करने वाले होटल ऐसी इकाइयों पर आईटीसी का लाभ नहीं उठा पाएंगे। इसका कारण ऐसी आपूर्तियों पर आईटीसी के बिना पांच प्रतिशत जीएसटी दर लागू है। इसी प्रकार, सौंदर्य और शारीरिक स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बिना आईटीसी के पांच प्रतिशत की दर है।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ने कहा कि ऐसे सेवा प्रदाता जो बिना आईटीसी वाली पांच प्रतिशत श्रेणी में आते हैं, उनके पास इन सेवाओं पर आईटीसी के साथ 18 प्रतिशत शुल्क लेने का विकल्प नहीं है।

नांगिया एंडरसन एलएलपी के भागीदार (अप्रत्यक्ष कर) राहुल शेखर ने कहा, ‘‘सरकार चाहती है कि अंतिम ग्राहक को इन बदलावों का अधिकतम लाभ मिले, इसलिए उसने इन उद्योगों के लिए दोहरी दर संरचना की अनुमति नहीं दी है।’’

बार-बार पूछे जाने प्रश्नों की सूची के अनुसार, जो व्यवसाय बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के पांच प्रतिशत स्लैब में हैं, वे ऐसी वस्तुओं और सेवाओं के कच्चे माल पर चुकाए गए करों पर क्रेडिट का दावा नहीं कर पाएंगे। उदाहरण के लिए, कोई होटल, जो कमरों के लिए पूरी तरह से प्रयुक्त प्रसाधन सामग्री या सुविधाएं खरीदता है, जिन पर पांच प्रतिशत की दर से आईटीसी नहीं ली जाती, तो वह उन खरीदों पर आईटीसी का लाभ नहीं उठा सकता।

सीबीआईसी ने कहा, ‘‘ऐसी सेवाओं की आपूर्ति में विशेष रूप से उपयोग की जाने वाली वस्तुओं या सेवाओं पर लगाए गए इनपुट टैक्स का क्रेडिट सेवा प्रदाता द्वारा नहीं लिया जाएगा।’’

हालांकि, ऐसे मामलों में जहां वस्तुओं या सेवाओं का उपयोग आंशिक रूप से बिना आईटीसी के पांच प्रतिशत कर योग्य आपूर्ति के लिए और आंशिक रूप से अन्य कर योग्य आपूर्ति (मान लीजिए, आईटीसी के साथ 18 प्रतिशत कर योग्य) के लिए किया जाता है, क्रेडिट को विभाजित किया जाना चाहिए।

सीबीआईसी ने कहा, ‘‘ऐसी सेवाओं की आपूर्ति के लिए आंशिक रूप से और आंशिक रूप से अन्य कर योग्य आपूर्ति के लिए उपयोग की जाने वाली वस्तुओं या सेवाओं पर लगाए गए इनपुट टैक्स का क्रेडिट सेवा प्रदाता द्वारा उसी प्रकार ‘रिवर्स’ किया जाएगा जैसे कि बिना आईटीसी के पांच प्रतिशत कर योग्य आपूर्ति एक छूट प्राप्त आपूर्ति है। परिणामस्वरूप, सेवा प्रदाता द्वारा आनुपातिक आईटीसी को ‘रिवर्स’ करना आवश्यक होगा।’’

एएमआरजी एंड एसोसिएट्स के वरिष्ठ भागीदार रजत मोहन ने कहा कि जब जीएसटी कानून आईटीसी के बिना पांच प्रतिशत की रियायती दर निर्धारित करता है, तो यह प्रभावी रूप से इनपुट पर क्रेडिट से मना करता है। ऐसी आपूर्ति को छूट प्राप्त सेवाओं के बराबर मानता है।

मोहन ने कहा, ‘‘इसका उद्देश्य अनुपालन को सरल बनाना और अंतिम उपभोक्ताओं के लिए कर भार को कम करना है लेकिन इसके बदले में सेवा प्रदाताओं को आईटीसी से वंचित किया जाता है। इस प्रकार, जहां ग्राहकों को कम कर दरों का लाभ मिलता है, वहीं आपूर्तिकर्ताओं को अपनी इनपुट श्रृंखला में जीएसटी की अंतर्निहित लागत वहन करनी पड़ती है, जिसके लिए सावधानीपूर्वक विभाजन और ‘रिवर्सल’ की आवश्यकता होती है।’’

व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा को दी गई छूट के दायरे में कौन सी बीमा सेवाएं शामिल हैं, इस प्रश्न पर, सीबीआईसी ने कहा कि समूह बीमा को छोड़कर, बीमाकर्ताओं द्वारा बीमित व्यक्ति को प्रदान की जाने वाली व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जीवन बीमा कारोबार की सेवाएं छूट के दायरे में शामिल हैं।

इसमें कहा गया, ‘‘जब ये सेवाएं किसी व्यक्ति या उसके/उसके परिवार को प्रदान की जाती हैं, तो उन्हें छूट दी जाएगी।’’

जीएसटी के तहत ईंटों पर कराधान के संबंध में, सीबीआईसी ने कहा कि तीन सितंबर, 2025 को हुई 56वीं जीएसटी परिषद की बैठक में चूना पत्थर ईंटों को छोड़कर विशेष ‘कंपोजिशन’ योजना की दरों में किसी भी बदलाव की सिफारिश नहीं की गई थी, जिन पर कर 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है।

इसलिए, चूना पत्थर (सैंड लाइम) ईंटों को छोड़कर, सभी प्रकार की ईंटों पर बिना आईटीसी के छह प्रतिशत और आईटीसी के साथ 12 प्रतिशत जीएसटी बना रहेगा। इसकी पंजीकरण सीमा 20 लाख रुपये है।

आपूर्ति श्रृंखला में पहले से मौजूद दवाओं की पुनः लेबलिंग के संबंध में, सीबीआईसी ने राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) के निर्देशों को दोहराया, जिसमें कहा गया था कि दवाओं के एमआरपी में नई जीएसटी दरें प्रतिबिंबित होनी चाहिए, लेकिन यदि डीलर/खुदरा विक्रेताओं को संशोधित मूल्य सूची प्रदान करके अनुपालन सुनिश्चित किया जा सकता है, तो 22 सितंबर, 2025 से पहले जारी मौजूदा स्टॉक को वापस मंगाने या पुनः लेबल करने की आवश्यकता नहीं है,

शेखर ने कहा, ‘‘एफएमसीजी (दैनिक उपयोग का सामान बनाने वाली कंपनियों) और खुदरा क्षेत्र की कंपनियों जैसे अन्य क्षेत्रों को भी इसी समस्या का सामना करना पड़ेगा। सरकार को अन्य क्षेत्रों के लिए भी स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए कि उत्पादों के एमआरपी में बदलाव किए बिना खुदरा विक्रेताओं, डीलरों के पास पहले से मौजूद स्टॉक पर अंतिम ग्राहक तक कम कीमत कैसे पहुंचाई जा सकती है।’’ भाषा रमण अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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