नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) औषधि विभाग के सचिव अमित अग्रवाल ने मंगलवार को कहा कि सरकार इसी महीने दवा और चिकित्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक योजना औपचारिक रूप से शुरू करने पर विचार कर रही है।
औषधि चिकित्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अनुसंधान और नवोन्मेष को बढ़ावा देने (पीआरआईपी) के लिए 5,000 करोड़ रुपये के अनुमानित व्यय के साथ योजना 17 अगस्त, 2023 को अधिसूचित की गई थी। कुल व्यय में से 4,250 करोड़ रुपये इस क्षेत्र के भीतर अनुसंधान एवं विकास परिवेश में निवेश में तेजी लाने पर केंद्रित हैं।
अग्रवाल ने यहां एक कार्यक्रम में मं कहा, ‘‘हम अब भारत में नवाचार पर बहुत बड़े पैमाने पर ध्यान दे रहे हैं। इसलिए हमारे पास एक योजना (पीआरआईपी) है जिसकी घोषणा कुछ समय पहले की गई थी, लेकिन हमें उम्मीद है कि हम इसे इसी महीने शुरू कर देंगे।’’
उन्होंने कहा कि इस योजना में औषधि और चिकित्सा प्रौद्योगिकी दोनों शामिल होगी। इसमें प्रारंभिक और अंतिम चरण दोनों के लिए वित्तीय सहायता हो सकती है।
सचिव ने कहा, ‘‘हम भारत में मूल्य-आधारित उत्पादों के लिए जरूरी कच्चे माल और जरूरी घटकों के उत्पादन को परिवेश की क्षमता को भी मजबूत करने पर विचार कर रहे हैं, जिससे भारत में उत्पादन को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।’’
अग्रवाल ने कहा कि चिकित्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्र पिछले डेढ़ दशक से दहाई अंक की वृद्धि दर्ज कर रहा है और इस बात के पूरे संकेत हैं कि यह वृद्धि कुछ और वर्षों तक नहीं, बल्कि आने वाले दशकों तक जारी रहेगी।
उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे के संदर्भ में, देश में तीन चिकित्सा उपकरण पार्क बनने वाले हैं।
अग्रवाल ने कहा, ‘‘इन सभी के 2027 की शुरुआत तक चालू होने की उम्मीद है और इससे हमें एक अच्छा अवसर मिलेगा… और योजना के अगले संस्करण में, हम स्थानीय स्तर पर उपलब्ध चिकित्सा स्तर की सामग्रियों के लिए और अधिक विशिष्ट सुविधाएं बनाने की योजना बना रहे हैं, जिससे हमें एक पैमाना मिलेगा।’’
भाषा रमण अजय
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