नयी दिल्ली, 11 सितंबर (भाषा) तेल, गैस और कोल बेड मीथेन (सीबीएम) क्षेत्रों में उपयोग होने वाले पूंजीगत उत्पादों पर हाल ही में जीएसटी बढ़ाने से परिचालन लागत बढ़ गई है और आयात निर्भरता कम करने के प्रयास प्रभावित हो रहे हैं। उद्योग मंडल फिक्की ने यह बात कही है।
पूंजीगत वस्तुओं के दायरे में मशीनरी, पंप, ड्रिलिंग उपकरण जैसे सामान आते हैं जिनका उद्योग या उत्पादन प्रक्रिया में लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाता है।
फिक्की ने नौ सितंबर को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को लिखे एक पत्र में कहा कि पूंजीगत उत्पादों पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को बढ़ाना हाल ही में पारित तेल-क्षेत्र नियमन एवं विकास अधिनियम के मकसद के उलट है। इस कानून का मकसद खोज और उत्पादन परिचालकों को वित्तीय स्थिरता प्रदान करना है।
पूंजीगत वस्तुओं पर जीएसटी दर में हाल ही में वृद्धि की गई है। पहले यह दर 12 प्रतिशत थी, जिसे बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। यह बदलाव 22 सितंबर 2025 से प्रभावी होगा।
उद्योग मंडल ने कहा, “तेल, प्राकृतिक गैस और सीबीएम क्षेत्रों में पूंजीगत वस्तुओं पर जीएसटी 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत करने से परिचालन पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। ये क्षेत्र जोखिम पूंजी पर निर्भर हैं, जिससे निवेशों में कमी और निवेशकों का भरोसा प्रभावित होता है।”
फिक्की ने कहा कि सीबीएम क्षेत्र में अब तक राजस्व साझेदारी का मॉडल अपनाया गया है और कोई लागत वसूली नहीं होती है। ऐसे में जीएसटी बढ़ाने का कदम आयात निर्भरता घटाने के रोडमैप के खिलाफ है।
उद्योग मंडल ने सुझाव दिया है कि जीएसटी दरों पर पुनर्विचार किया जाए और खोज एवं उत्पादन अनुबंधों के अनुरूप कर बोझ को शून्य किया जाए। यह कदम घरेलू प्राकृतिक गैस उत्पादन को बढ़ावा देगा।
इसके अलावा, प्राकृतिक गैस को जीएसटी में शामिल किया जाना चाहिए ताकि उद्योग में इनपुट टैक्स क्रेडिट की अनुपलब्धता के कारण उत्पादन लागत न बढ़े।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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