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Wednesday, 11 March, 2026
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एसएमई को लेकर बढ़ रहा बैंकों का जोखिम, एफडी दरें निचले स्तर परः इक्रा

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मुंबई, 10 सितंबर (भाषा) घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा ने बुधवार को कहा कि बैंकों का छोटे एवं मझोले उद्यमों (एसएमई) के प्रति जोखिम बढ़ रहा है और यह वित्तीय प्रणाली के लिए चुनौती बन सकता है।

रेटिंग एजेंसी ने यह भी संकेत दिया कि बैंकों की सावधि जमा (एफडी) दरें अब निचले स्तर पर आ चुकी हैं और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा नीतिगत दरों को स्थिर रखने पर भी इनमें और गिरावट होने की संभावना कम है।

इक्रा रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष के लिए बैंकिंग प्रणाली की ऋण वृद्धि दर 10.5 प्रतिशत रहने का अनुमान बरकरार रखा है। वहीं गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की प्रबंधन-अधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) में 15 से 17 प्रतिशत वृद्धि हो सकती है।

इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल गुप्ता ने कहा कि एसएमई ऋण पोर्टफोलियो में दबाव के संकेत दिख रहे हैं। खास तौर पर 25 लाख रुपये से कम के उधार लेने वाली एकल स्वामित्व फर्मों में तनाव दिख रहा है।

मार्च, 2025 में एनबीएफसी का एसएमई ऋणों पर नुकसान बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गया जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा तीन प्रतिशत था।

गुप्ता ने कहा कि उच्च ब्याज दर (20 प्रतिशत से अधिक) और छोटे आकार वाले ऋणों में सबसे ज्यादा दबाव देखा जा रहा है।

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई के दरों में कटौती की संभावना नहीं दिख रही है और केंद्रीय बैंक लंबे समय तक स्थिर रुख बनाए रख सकता है।

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि बैंकों का शुद्ध ब्याज मार्जिन चालू सितंबर तिमाही में निचले स्तर पर पहुंच जाएगा। वर्तमान में प्रमुख बैंक एक साल की सावधि जमा पर छह प्रतिशत ब्याज दे रहे हैं।

अगर ऋण वृद्धि कमजोर पड़ी तो बैंक जमा दरों में और कमी कर सकते हैं, भले ही आरबीआई दरों में कटौती न करे।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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