(शरीष बी प्रधान)
काठमांडू, नौ सितंबर (भाषा) नेपाल में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज होने के बीच प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली ने मंगलवार को देश की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है।
ओली ने एक बयान जारी करके बताया कि यह बैठक शाम छह बजे आयोजित की जाएगी, हालांकि बैठक स्थल का उल्लेख नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, “हिंसा समाधान नहीं है। हमें बातचीत के जरिये शांतिपूर्ण समाधान निकालना होगा।”
काठमांडू और देश के अन्य हिस्सों में कर्फ्यू लागू होने के बावजूद छात्रों के नेतृत्व में जारी प्रदर्शन और अधिक उग्र हो गए हैं।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि केवल गृहमंत्री के इस्तीफे से बात नहीं बनेगी, प्रधानमंत्री ओली को भी जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ना चाहिए।
गौरतलब है कि सोमवार को सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिबंध के विरोध में युवाओं के हिंसक प्रदर्शन पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग किए जाने के बाद गृह मंत्री रमेश लेखक ने इस्तीफा दे दिया था। इस कार्रवाई में 19 लोगों की मौत हो गई थी और 300 से अधिक घायल हो गए थे।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “सिर्फ गृह मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है। प्रधानमंत्री को भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और इस्तीफा देना चाहिए।”
इस बीच, प्रमुख ऑनलाइन समाचार पोर्टल ने सोमवार को काठमांडू में हुई पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की तथा इसे नेपाल के हालिया इतिहास के सबसे घातक दिनों में से एक बताया है।
लोकप्रिय न्यूज पोर्टल उकेरा डॉट कॉम ने आठ सितंबर को “काला दिन” बताते हुए लिखा कि “नेपाल के इतिहास में एक ही दिन में सबसे अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत हुई।”
पोर्टल ने प्रधानमंत्री ओली से इस्तीफे की मांग की है।
एक अन्य समाचार पोर्टल रातोपाटी ने सरकार पर छात्रों और युवाओं पर अंधाधुंध गोलीबारी का आरोप लगाते हुए इस “कायराना कार्रवाई” को “अत्यंत निंदनीय” बताया।
रातोपाटी ने लिखा कि युवाओं का यह आंदोलन राजनीतिक नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, बेरोजगारी और सामाजिक अव्यवस्था के खिलाफ हताशा से प्रेरित है।
भाषा मनीषा अमित
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