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Tuesday, 24 March, 2026
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दाल उत्पादन बढ़ाने के लिए संकर किस्में और बेहतर बीज को लाना महत्वपूर्ण: कृषि सचिव

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नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि दालों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए दलहनों की उच्च उपज वाली किस्मों और बेहतर बीज के उपयोग की दिशा में शोध की जरूरत है।

दलहनों पर नीति आयोग की रिपोर्ट के विमोचन के अवसर पर बोलते हुए, चतुर्वेदी ने कहा कि देश के सामने दालों और तिलहनों का उत्पादन बढ़ाने की एक बड़ी चुनौती है। हालांकि, चावल और गेहूं के उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

सचिव ने सभी प्रकार की दाल किस्मों के उत्पादन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा, ‘‘दलहनें भारत में आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और खाद्य तेलों के विपरीत, इनमें लचीलापन और प्रतिस्थापन क्षमता बहुत कम होती है।’’

हालांकि, सरकार ने पिछले बजट में की गई घोषणा के अनुसार अगले चार वर्षों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अतिरिक्त दालों – विशेष रूप से अरहर, उड़द और मसूर – की खरीद का आश्वासन दिया है, लेकिन उच्च उपज वाली किस्में विकसित करने के लिए शोध बढ़ाने की आवश्यकता है।

चतुर्वेदी ने कहा, ‘‘दलहन एक ऐसी खाद्य फसल है जिसकी कोई संकर किस्में नहीं हैं। केवल खुले परागण वाली किस्में ही सरकार या स्वयं किसानों द्वारा उत्पादित की जाती हैं। संकर किस्मों के विकास पर आईसीएआर संगठनों और कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा व्यापक शोध किया जा रहा है। यदि यह संभव हो जाता है, तो हमारी उत्पादकता बहुत बड़े पैमाने पर बढ़ जाएगी।’’

सचिव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि दलहनों में किस्म प्रतिस्थापन दर संतोषजनक तो है, लेकिन बीज प्रतिस्थापन दर अभी भी पीछे है।

उन्होंने कहा, ‘‘एक किस्म विकसित की गई है, लेकिन यह सुनिश्चित करने में एक कमी है कि यह किसानों तक पहुंचे। राज्यों की इसमें बड़ी भूमिका है और राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है।’’

उन्होंने कहा कि नीति आयोग की रिपोर्ट ‘‘आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की ओर दलहनों के विकास में तेजी लाने के लिए रणनीतियां और मार्ग’’ में सुझाया गया क्लस्टर दृष्टिकोण इस नियोजन कमी को दूर करने में मदद करेगा।

आईसीएआर के महानिदेशक एमएल जाट ने उत्पादकता स्तर बढ़ाने पर ज़ोर दिया।

उन्होंने कहा कि रबी दलहनों के लिए कोई खर-पतवारनाशी अणु उपलब्ध नहीं है जिसका उपयोग उगने के बाद किया जा सके। उन्होंने कहा, ‘‘खरपतवार 30-40 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा रहे हैं। हमें इस पर शोध केंद्रित करने की आवश्यकता है।’’

उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर बीज प्रणाली को और मज़बूत करना दलहन उत्पादकता के महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है।

नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम और सदस्य रमेश चंद ने भी आने वाले वर्षों में दलहनों का उत्पादन बढ़ाने पर ज़ोर दिया।

फसल वर्ष 2024-25 (जुलाई-जून) में भारत का दाल उत्पादन दो करोड़ 52.3 लाख टन होना अनुमानित है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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