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Friday, 29 August, 2025
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शिक्षा में डिजिटल खाई: बिहार, बंगाल के सिर्फ 25% स्कूलों में कंप्यूटर, देश में 65%: सरकारी रिपोर्ट

बंगाल के सिर्फ 18.6% स्कूलों में इंटरनेट कनेक्शन है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर औसत 63.5% है. चंडीगढ़, दिल्ली और लक्षद्वीप में 100% सुविधा मौजूद है.

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नई दिल्ली: पिछले कुछ सालों में स्कूलों की सुविधाओं में सुधार ज़रूर हुआ है, लेकिन कक्षाओं में डिजिटल खाई अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है. नवीनतम यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार, बिहार और पश्चिम बंगाल का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है. यह रिपोर्ट गुरुवार को जारी की गई थी.

रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार के सिर्फ 25.2% और पश्चिम बंगाल के 25.1% स्कूलों (सरकारी व प्राइवेट दोनों) में कंप्यूटर की सुविधा है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत 64.7% है.

दोनों राज्य देश के पूर्वी हिस्से में स्थित हैं और बड़ी आबादी वाले हैं. साथ ही, दोनों जगह जल्द ही चुनाव होने हैं—बिहार में नवंबर में और बंगाल में अगले साल की पहली छमाही में.

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि मेघालय सबसे निचले पायदान पर है, जहां केवल 19.7% स्कूलों में कंप्यूटर उपलब्ध हैं. हालांकि, राष्ट्रीय औसत में सुधार हुआ है और यह 60% का आंकड़ा पार कर गया है (2023-24 में 57.2%).

शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी UDISE+ रिपोर्ट में नामांकन, ड्रॉपआउट दर, शिक्षकों की संख्या और आधारभूत सुविधाओं जैसे शौचालय, बिजली, पानी व कंप्यूटर आदि की उपलब्धता का भी विवरण है.

रिपोर्ट में बिहार के सरकारी स्कूलों की कमजोर स्थिति साफ दिखी. राज्य के 72% प्राइवेट स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा है, लेकिन सरकारी स्कूलों में यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 16.5% रह जाता है. वहीं, बंगाल में हालात उलट हैं—यहां 21.3% सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा है, जबकि प्राइवेट सेक्टर में यह 53.3% है.

कंप्यूटर सुविधा से जुड़ी इंटरनेट पहुंच में भी बड़ी खाई सामने आई है. पश्चिम बंगाल इस मामले में सबसे नीचे है, जहां सिर्फ 18.6% स्कूलों में इंटरनेट है. इसके विपरीत, चंडीगढ़, दिल्ली और लक्षद्वीप के सभी स्कूलों में 100% इंटरनेट कनेक्टिविटी है. राष्ट्रीय स्तर पर औसत 63.5% है, जो पिछले साल से करीब 10 प्रतिशत अंक अधिक है.

पानी और शौचालय की सुविधा में सुधार

हालांकि, डिजिटल सुविधा कमज़ोर है, लेकिन पानी और शौचालय जैसी मूलभूत जरूरतों में धीरे-धीरे सुधार दिख रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में 99.3% स्कूलों में अब पीने के पानी की सुविधा मौजूद है. यह 2023-24 में 95.9% थी. कुल 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस मामले में 100% लक्ष्य हासिल कर लिया है.

इसी तरह, 95.8% स्कूलों में अब शौचालय काम कर रहे हैं, जबकि 2023-24 में यह 95.4% था. मेघालय (75.6%) और अरुणाचल प्रदेश (79.7%) इस मामले में पीछे हैं.

इस उपलब्धि का श्रेय स्वच्छ विद्यालय पहल को भी दिया जा रहा है, जो स्वच्छ भारत मिशन का हिस्सा है. इसके तहत हर स्कूल में पीने का पानी, साफ-सफाई और अलग-अलग लड़के-लड़कियों के लिए शौचालय उपलब्ध कराना अनिवार्य है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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