नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में जिला न्यायपालिका के वकीलों की लगातार जारी हड़ताल के बीच, दिल्ली उच्च न्यायालय में बुधवार को एक याचिका का उल्लेख किया गया जिसमें उपराज्यपाल (एलजी) द्वारा जारी उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जो पुलिस अधिकारियों को थानों से ही अदालतों में डिजिटल माध्यम से साक्ष्य दर्ज करने की अनुमति देती है।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ के समक्ष याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया।
अदालत ने इसे जनहित याचिका मानते हुए मामले की सुनवाई तीन सितंबर के लिए स्थगित कर दी।
पीठ ने वकील से कहा, “आप इसे दाखिल करें। यह बुधवार को सूचीबद्ध होगी।”
दिल्ली की जिला अदालतों के वकील उपराज्यपाल की 13 अगस्त की अधिसूचना को वापस लेने की मांग को लेकर 22 अगस्त से काम से विरत हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने बुधवार को अधिसूचना की “कड़ी निंदा” की और वकीलों से विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधने का आग्रह किया।
सभी जिला अदालतों के वकील इसे वापस लेने की मांग को लेकर 22 अगस्त से काम से विरत हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (डीएससीबीए) ने कहा, “ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के उपराज्यपाल द्वारा जारी 13 अगस्त, 2025 की अधिसूचना की डीएचसीबीए की कार्यकारी समिति सर्वसम्मति से कड़ी निंदा करती है, जिसमें पुलिस थानों में वीडियो कॉन्फ्रेंस रूम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पुलिस कर्मियों/अधिकारियों के साक्ष्य दर्ज करने के उद्देश्य से ‘निर्दिष्ट स्थान’ घोषित किया गया है।”
इसने वकीलों से आग्रह किया कि जब तक कि इसे वापस नहीं ले लिया जाता तब तक वे अधिसूचना के विरोध में अदालत में पेश होने के दौरान काली पट्टी बांधें।
भाषा
प्रशांत पवनेश
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