(लक्ष्मी देवी ऐरे)
नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) संघर्ष, जलवायु परिवर्तन और संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के वित्तपोषण में 40 प्रतिशत की भारी कटौती के बीच वैश्विक भूखमरी के बढ़ने के बीच, डब्ल्यूएफपी के उप कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काउ ने सोमवार को कहा कि खाद्यान्न की कमी वाले देश से वैश्विक सहायता आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत का उल्लेखनीय रूपांतरण एक महत्वपूर्ण जीवनरेखा के रूप में उभरा है।
स्काउ ने पीटीआई-भाषा के साथ विशेष साक्षात्कार में इस बात पर ज़ोर दिया कि पश्चिमी वित्तपोषण में कमी के साथ भारत जैसी उभरती शक्तियों के साथ सहयोग आवश्यक हो गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह महत्वपूर्ण है। एक तो इसलिए क्योंकि पश्चिमी ओईसीडी देश वित्तपोषण में कटौती कर रहे हैं। लेकिन मुझे लगता है कि यह महत्वपूर्ण भी है क्योंकि भारत ने अपनी खाद्य सुरक्षा से निपटने के लिए स्वयं समाधान खोजे हैं।’’
डब्ल्यूएफपी के मुख्य परिचालन अधिकारी स्काउ ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत के घरेलू समाधान यूरोप या उत्तरी अमेरिका के हालिया अनुभवों की तुलना में अफ्रीका और एशिया के संकटग्रस्त क्षेत्रों में अधिक लागू करने योग्य हैं।
देश के नवोन्मेषी दृष्टिकोण, जिनमें अनाज एटीएम और चावल का पोषक तत्वों से समृद्धिकरण शामिल है, अब गाजा और सूडान जैसे संघर्ष क्षेत्रों में राहत प्रयासों को नया रूप दे रहे हैं।
स्काउ ने द्विपक्षीय संबंधों, जी20 मंचों और एक क्षेत्रीय महाशक्ति के रूप में देश की बढ़ती उपस्थिति की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘‘जब विचारों और समाधानों की बात आती है, तो भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका के पास देने के लिए बहुत कुछ है। लेकिन कूटनीति के मोर्चे पर भी, भारत का प्रभाव बढ़ रहा है।’’
डब्ल्यूएफपी स्काउ की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने की योजना बना रहा है ताकि भारत से पोषक तत्वों से समृद्ध किये गये चावल की खरीद सुनिश्चित की जा सके और संकट के दौरान तेज़ और उच्च गुणवत्ता वाली सहायता पहुंचाई जा सके।
यह साझेदारी भारत के खाद्य अधिशेष की स्थिति का लाभ उठाती है, जिससे देश अब प्राकृतिक आपदाओं और आपात स्थितियों के दौरान बड़ी मात्रा में खाद्यान्न शीघ्रता से उपलब्ध कराने में सक्षम है।
स्काउ के अनुसार, स्मार्ट वेयरहाउसिंग और आपूर्ति श्रृंखला अनुकूलन से संबंधित भारत की सफल पह को डब्ल्यूएफपी द्वारा वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस साझेदारी से पहले ही महत्वपूर्ण बचत हुई है, जिसमें आपूर्ति श्रृंखला अनुकूलन के माध्यम से तीन करोड़ डॉलर की बचत शामिल है, जिसका उपयोग इथियोपिया और सूडान में संकट के समय किया जा रहा है।
देश का राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और मध्याह्न भोजन योजना सूडान और हैती जैसे देशों के लिए आदर्श हैं, और विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) भारत की विशेषज्ञता को वैश्विक स्तर पर साझा करने के लिए एक ‘उत्कृष्टता केंद्र’ स्थापित करने का लक्ष्य रखता है।
स्काउ ने बताया, ‘‘भारत की कहानी, जहां हम सहायता प्रदान करते थे, से लेकर अब खाद्य अधिशेष वाले खाद्य निर्यातक तक, प्रभावशाली प्रगति दर्शाती है। वैश्विक खाद्य संकट से निपटने के लिए हम भारत से उत्कृष्ट पहल की अपेक्षा करते हैं।’’
खाद्य सहायता के अलावा, विश्व खाद्य कार्यक्रम अफ़गानिस्तान, म्यांमा, यमन और गाजा सहित संघर्ष क्षेत्रों में मानवीय पहुंच को बढ़ावा देने में भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव की ओर देख रहा है। इन संकटग्रस्त क्षेत्रों में सहायता पहुंचाने में भारत की कूटनीतिक ताकत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
गाजा में, जहां डब्ल्यूएफपी ने क्षेत्र के कुछ हिस्सों में अकाल की घोषणा की है, संगठन हर महीने दस लाख लोगों की सहायता कर रहा है, लेकिन उसे पहुंच की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में 100 ट्रक की तुलना में उसे प्रतिदिन 300-400 ट्रक की आवश्यकता है।
स्काउ ने तत्काल युद्धविराम और पहुंच कायम करने की मांग करते हुए कहा, ‘‘इस समय, यह अब तक का सबसे बुरा दौर है।’’
स्काउ ने सूडान, हैती और कांगो में कम रिपोर्ट किए गए संकटों पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया और सरकारों, व्यवसायों और व्यक्तियों से संसाधन और राजनयिक सहायता प्रदान करने का आग्रह किया।
भाषा राजेश राजेश अजय
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