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Thursday, 28 August, 2025
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बीएमसी चुनाव से पहले शिवसेना के दोनों प्रतिद्वंद्वी गणेश मंडलों के समर्थन के लिए जूझ रहे

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(तस्वीरों के साथ)

(प्रशांत रंगनेकर)

मुंबई, 24 अगस्त (भाषा) बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के आगामी चुनाव में जीत के लिए जोर-आजमाइश के मद्देनजर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और उसकी प्रतिद्वंद्वी शिवसेना (उबाठा) गणेश मंडलों के समर्थन के लिए जद्दोजहद कर रही हैं क्योंकि ये गणेश मंडल सामाजिक-राजनीतिक केंद्र होने के साथ-साथ परंपरागत रूप से जमीनी कार्यकर्ताओं और मतदाता संपर्क के लिए आधार के रूप में काम करते हैं।

शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दावा है कि गणेश उत्सव के आयोजन के लिए प्रदान की जा रही ‘‘अभूतपूर्व’’ सहायता के कारण कई मंडल अपने समर्थन में बदलाव कर रहे हैं।

शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रतिद्वंद्वी गुट पर मंडलों को पैसे का प्रलोभन देने का आरोप लगाया है।

ठाकरे ने इस महीने की शुरुआत में गणेश मंडलों के प्रतिनिधियों से कहा था, ‘‘मंडलों को कौन ले जा रहा है? आप उन्हें कहां ले जाओगे? आप आखिरकार मुंबई में ही रहेंगे। जब तक गणपति बप्पा का आशीर्वाद हमारे साथ है, तब तक हम मंडलों को ले जाने को लेकर चिंतित नहीं है।’’

शिवसेना के एक पदाधिकारी ने कहा कि पार्टी द्वारा दिए गए उदार समर्थन के कारण मंडलों में शिंदे की लोकप्रियता बढ़ी है।

मंडलों (सामुदायिक संगठन जो गणेश चतुर्थी को प्रमुखता से मनाते हैं) का समर्थन शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के लिए अहम साबित हो सकता है, जो अब भी मुंबई के राजनीतिक परिदृश्य में पैर जमाने के लिए संघर्ष कर रही है। इन मंडलों पर लंबे समय तक अविभाजित शिवसेना का प्रभुत्व रहा है।

मुंबई में लगभग 14,000 मंडल हैं जिनमें से 8,000 पंजीकृत हैं।

राजनीतिक विश्लेषक अभय देशपांडे के मुतबिक, ये मंडल दही हांडी, नवरात्रि और कुछ मामलों में साईबाबा उत्सव का भी आयोजन करते हैं तथा स्थानीय राजनीति पर अच्छा-खासा प्रभाव रखते हैं।

उन्होंने बताया कि पार्षद, विधायक और सांसद अकसर मंडलों को सहयोग देने में भूमिका निभाते हैं, जो काफी हद तक दान पर निर्भर होते हैं।

देशपांडे ने कहा, ‘‘अकसर, युवा मंडल कार्यकर्ता चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों के जमीनी कार्यकर्ता के तौर पर काम करते हैं। दूसरी ओर, वे जनप्रतिनिधियों के लिए बाहुबल का भी काम करते हैं, और हर पार्टी इस संसाधन का इस्तेमाल करती है।’’

उन्होंने कहा कि मंडल दान देने वाले नेताओं के बैनर भी लगाते हैं।

शिवसेना (उबाठा) के एक पदाधिकारी ने बताया कि कैसे गणेश मंडलों ने एक पूर्व पार्षद को लोकसभा का टिकट दिलाने में मदद की। पार्षद ने दिल खोलकर दान दिया था, जिसके चलते मंडलों ने उनके बैनर प्रमुखता से लगाए और पार्टी नेतृत्व का ध्यान आकर्षित किया।

ऐतिहासिक रूप से, इन मंडलों पर अविभाजित शिवसेना का प्रभुत्व रहा है।

कभी अविभाजित शिवसेना का गढ़ रहे लालबाग-परेल के एक शिवसेना (उबाठा) पदाधिकारी ने कहा कि 1966 में जब पार्टी की स्थापना हुई थी, तब बाल ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं को गणेश, नवरात्रि और दही हांडी समारोहों के आयोजन मंडलों में प्रभावी होने का निर्देश दिया था।

इसके परिणामस्वरूप अधिकतर मंडलों पर शिवसेना का दशकों तक निर्विवाद प्रभुत्व बना रहा।

हालांकि, पिछले दो-तीन वर्षों में पार्टी के विभाजन और शिंदे के नए नेता के रूप में उभरने के बाद स्थितियों में बदलाव हो रहा है।

शिवसेना (उबाठा) के पदाधिकारी ने स्वीकार किया कि शिंदे के नेतृत्व वाला गुट चंदे के जरिए मंडलों को आकर्षित कर रहा है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) जैसे अन्य दल भी सक्रिय रूप से उनके साथ जुड़ रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘पहले, अविभाजित शिवसेना से जुड़े मंडलों को पार्टी समर्थकों का समर्थन प्राप्त था। शिंदे के कार्यभार संभालने के बाद से, मंडलों को मिलने वाले दान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे कई मंडलों ने अपनी निष्ठा बदल ली है।’’

मुंबई की जमीनी राजनीति में पार्षदों की अहम भूमिका होती है। शिवसेना(उबाठा) के एक पदाधिकारी ने बताया कि 50 से ज्यादा पूर्व पार्षद शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो चुके हैं और उन्होंने विभिन्न मंडलों के लिए धन जुटाने में मदद की है।

हालांकि, उन्होंने दावा किया कि मूल शिवसेना के प्रति मंडलों की पारंपरिक निष्ठा मजबूत बनी हुई है।

उन्होंने कहा, ‘‘पैसे से हमेशा वफादारी नहीं खरीदी जा सकती। कई मंडलों ने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना से वित्तीय सहायता स्वीकार की होगी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने पाला बदल लिया है।’’

शिंदे नीत शिवसेना के एक पदाधिकारी ने स्वीकार किया कि कई मंडलों ने उनकी पार्टी से संपर्क किया है।

उन्होंने कहा कि मंडल न केवल वित्तीय सहायता चाहते हैं, बल्कि उन्हें पंडाल लगाने और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के लिए अनुमति लेने में भी मदद की आवश्यकता होती है।

शिवसेना पदाधिकारी ने कहा, ‘‘हमने उनकी समस्याओं के समाधान के लिए चार महीने पहले एक सहायता डेस्क स्थापित की थी। इस साल, कई मंडलों ने हमसे संपर्क किया है। पिछले दो वर्षों से मंडलों को दी गई सहायता का स्तर अभूतपूर्व रहा है।’’ उन्होंने कहा कि शिंदे इस साल भी मुंबई और ठाणे के पंडालों का दौरा करेंगे।

बीएमसी का पिछला चुनाव 2017 में हुआ था।

भाषा धीरज नेत्रपाल

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यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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