नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) संसद की एक समिति ने आठ प्रतिशत की महत्वाकांक्षी वृद्धि दर को हासिल करने के लिए निवेश दर को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 31 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत करने की मंगलवार को सिफारिश की। संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कम-से-कम एक दशक के लिए आठ प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य पाने के लिए निवेश दर को बढ़ाकर जीडीपी का करीब 35 प्रतिशत करना होगा।
हालांकि, समिति ने निवेश बढ़ाने से चालू खाते के घाटे (कैड) पर दबाव बढ़ने की आशंका जताते हुए कहा है कि घरेलू मांग की अगुवाई वाली वृद्धि और नियमन में ढील देना भी जरूरी है।
भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली समिति ने केंद्र और राज्यों के बीच सहकारी संघवाद की भावना से भूमि, श्रम, पूंजी और विनियामक सुधारों पर संवाद बढ़ाने का भी सुझाव दिया।
समिति ने ऊर्जा क्षेत्र पर कहा कि सरकार को सस्ती और कुशल ऊर्जा नीति अपनानी चाहिए जो जलवायु प्रतिबद्धताओं और आर्थिक-सामाजिक उद्देश्यों में संतुलन बनाए। इसके साथ ही केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण से पंप भंडारण वाली परियोजनाओं को तेजी से विकसित करने का आग्रह किया।
संसदीय समिति ने कृषि क्षेत्र को समावेशी विकास का प्रमुख साधन बताते हुए कहा कि भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण, एकीकृत कृषि डेटाबेस तैयार करने और युवाओं को डेटा संग्रहण में प्रशिक्षित करने की जरूरत है।
इसके साथ ही समिति ने विविध फसलों के उत्पादन, आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी को जरूरी बताया।
समिति ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य साधने के लिए सरकारी वित्तीय अनुशासन, पूंजीगत व्यय की गुणवत्ता सुधारने, कृत्रिम मेधा (एआई) और डेटा के उपयोग, तथा एमएसएमई व महिला उद्यमियों को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण होगा।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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