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Wednesday, 4 March, 2026
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मध्यम दर्जे के पेशेवरों की डिजिटल बदलाव में अहम भूमिका : रिपोर्ट

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मुंबई, 19 अगस्त (भाषा) डिजिटल एवं कार्यस्थल पर बदलाव की नई लहर का नेतृत्व मध्यम दर्जे के पेशेवर कर रहे हैं। बड़ी संख्या में इस वर्ग के कमर्चारी अपने क्षेत्रों में अग्रणी बनने के लिए अतिरिक्त प्रशिक्षण हासिल करने के इच्छुक हैं। मंगलवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

नौकरी से जुड़ी वैश्विक वेबसाइट इन्डीड की ‘वर्क अहेड रिपोर्ट’ के अनुसार, 56 प्रतिशत मध्यम दर्जे के पेशेवरों का मानना है कि उन्हें भविष्य के लिए तैयार रहने के लिए अधिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है, जबकि उनके युवा समकक्षों में यह धारणा केवल 41 प्रतिशत है।

रिपोर्ट में कहा गया कि 35 से 54 वर्ष की आयु के उत्तरदाताओं (मध्यम दर्जे के पेशेवर) में आत्मविश्वास सबसे अधिक है, जिनमें से 49 प्रतिशत ने बताया कि वे कृत्रिम मेधा (एआई) से लैस कार्यस्थलों पर काम करने के लिए तैयार हैं। वे 18 से 24 वर्ष की आयु के अपने युवा साथियों से कहीं आगे दिखे।

इन्डीड इंडिया के बिक्री प्रमुख शशि कुमार ने कहा, ‘‘ भारत के कार्यबल में एक दृढ़ विश्वास का निर्माण हो रहा है। खासकर मध्यम दर्जे के पेशेवर न केवल एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं, बल्कि इसमें महारत हासिल करने के लिए सक्रिय रूप से कौशल उन्नयन के अवसरों की तलाश भी कर रहे हैं। ‘एजेंटिक एआई’ के प्रति बढ़ती रुचि इस बात का संकेत है कि हम एक ऐसे बदलाव की शुरुआत में हैं, जहां नौकरी चाहने वाले न केवल बदलाव से तालमेल बैठा रहे हैं बल्कि उसका नेतृत्व भी कर रहे हैं।’’

‘एजेंटिक एआई’ से तात्पर्य ऐसी कृत्रिम मेधा प्रणालियों से है जो स्वायत्त रूप से कार्य करने, लक्ष्य निर्धारित करने और जटिल कार्यों को पूरा करने में सक्षम हैं।

इन्डीड द्वारा जारी ‘वर्क अहेड रिपोर्ट’ बाजार अनुसंधान कंपनी सेन्ससवाइड द्वारा समूचे भारत में 3,001 श्रमिकों (ब्लू-कॉलर और व्हाइट-कॉलर) और व्यापारिक जगत के लोगों के बीच किए गए शोध पर आधारित है।

‘ब्लू-कॉलर’ कर्मचारी शारीरिक श्रम से जुड़े होते हैं, जैसे कारखाने या निर्माण कार्य में लगे लोग जबकि ‘व्हाइट-कॉलर’ कर्मचारी बौद्धिक या प्रशासनिक कार्य करते हैं जो कार्योलयों में कार्यरत होते हैं।

सर्वेक्षण में शामिल करीब 29 प्रतिशत कर्मचारियों ने कहा कि वे अपनी शर्तों पर अपने कौशल को उन्नत करने के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रमों तक पहुंच की तलाश कर रहे हैं।

कुमार ने कहा, ‘‘ जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे, एआई में कौशल विकास न केवल एक अच्छा अभ्यास होगा, बल्कि यह किसी के पेशेवर जीवन को गति देने वाला भी होगा। एआई कौशल से लैस कर्मचारी उच्च वेतन, पदोन्नति और भविष्य की भूमिकाओं के लिए बेहतर स्थिति में होंगे।’’

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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