चेन्नई, एक जुलाई (भाषा) मद्रास उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और दिव्यांगजन से संबंधित मामलों के मुख्य आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) जैसे वैधानिक निकायों के निर्वाचित बोर्ड में दिव्यांग व्यक्तियों को चार प्रतिशत आरक्षण देने के लिए उचित कदम उठाएं।
न्यायमूर्ति जी. आर. स्वामीनाथन और न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन की खंडपीठ ने पोलियो पक्षाघात से पीड़ित बी. रमेशबाबू की जनहित याचिका का निपटारा करते हुए हाल ही में यह निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता ने 10 मार्च, 2025 के अपने अभ्यावेदन में दिव्यांग व्यक्तियों को केन्द्रीय और राज्य अधिनियमों के तहत वैधानिक निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों के बारे में जानकारी देने के लिए प्राधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध किया था।
पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की शिकायत है कि बीसीआई, एनएमसी, डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया और फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया जैसी वैधानिक संस्थाओं में दिव्यांग व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व नहीं किया जा रहा है।
उच्चतम न्यायालय ने छह मई, 2025 को निर्देश दिया था कि महिलाओं को उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन की कार्यकारी समिति में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
पीठ के इस निर्देश पर गौर करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्ति का उपयोग करते हुए ऐसा निर्देश जारी किया था।
पीठ ने कहा, ‘उच्च न्यायालय एक संवैधानिक अदालत है, हालांकि वह तब तक कोई भी रिट जारी नहीं कर सकता जब तक कि याचिकाकर्ता किसी भी कानूनी अधिकार का हवाला नहीं देता है।”
उन्होंने कहा, ‘हालांकि, हम निश्चित रूप से प्रतिवादियों (प्राधिकारियों) को उस दिशा में उचित कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।’
पीठ ने केंद्र सरकार और दिव्यांगजन से संबंधित मामलों के मुख्य आयुक्त को निर्देश दिया है कि वे बीसीआई और एनएमसी जैसे वैधानिक निकायों के निर्वाचित बोर्ड में दिव्यांग व्यक्तियों को चार प्रतिशत आरक्षण देने के लिए उचित कदम उठाएं।
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जोहेब सुरेश
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