नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की एक इकाई ने एक छोटे सॉफ्टवेयर परिभाषित रेडियो (एसडीआर) और एक प्रमुख संचार प्रणाली के क्षेत्रीय परीक्षण को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए स्वदेशी और मिशन महत्वपूर्ण संचार समाधान विकसित करने की संगठन की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि ये परीक्षण उत्तराखंड के जोशीमठ क्षेत्र में रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स अनुप्रयोग प्रयोगशाला (डीईएएल), देहरादून द्वारा किए गए।
डीआरडीओ ने मंगलवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘दोनों प्रणालियों ने उपयोगकर्ता द्वारा परिभाषित परिचालन मानक को पूरा करते हुए मजबूत और विश्वसनीय प्रदर्शन दिखाया।’’
संगठन ने बताया कि परीक्षण गृह मंत्रालय, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) और अन्य एजेंसियों के साथ करीबी समन्वय में किए गए।
पोस्ट के मुताबिक, ‘‘डीईएएल, देहरादून ने उत्तराखंड के जोशीमठ में एसडीआर मैनपैक और कॉम्पैक्ट ट्रांसहोराइजन कम्युनिकेशन सिस्टम (सीटीसीएस) के फील्ड परीक्षण सफलतापूर्वक किए। परीक्षण एमएचए/सीएपीएफ/डीएलआईसी उपयोगकर्ता एजेंसियों और डीईएएल टीम के साथ करीबी समन्वय में किए गए। आईटीबीपी, एसएसबी, बीएसएफ, असम राइफल्स, आईबी, एनएसजी, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ और अन्य एजेंसियों के अधिकारियों ने भी परीक्षण में हिस्सा लिया।’’
पोस्ट में कहा गया है कि ये परीक्षण विभिन्न भूभागों और परिचालन वातावरण में किए गए, जिनका उद्देश्य वास्तविक दुनिया की स्थितियों में दोनों प्रणालियों के प्रदर्शन को कठोरता से सत्यापित करना था, जिसमें ‘क्यूआर और टीडीएस के अनुसार प्रमुख मापदंडों का सत्यापन’ भी शामिल था।
डीआरडीओ की वेबसाइट के अनुसार, ‘‘एसडीआर एक सुरक्षित स्वदेशी प्रणाली है, जो नौसेना अनुप्रयोग के लिए संचार प्रणाली और सुरक्षित डिजिटल वॉयस/डेटा संचार से लैस है, जिसमें सामरिक संचार के लिए 3-चैनल (2वी/यूएचएफ बैंड और 1 एचएफ बैंड) और 4-चैनल (2वी/यूएचएफ बैंड और 2एल-बैंड) तथा वी/यूएचएफ (मैनपैक भूमिका) और यूएचएफ बैंड (हैंडहेल्ड भूमिका) में एकल चैनल संचालन शामिल है।’’
डीआरडीओ की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सीटीसीएस एक ‘बड़ी हॉप स्थलीय बैकहॉल संचार प्रणाली’ है, जिसे डीईएएल, देहरादून द्वारा उपयोगकर्ता स्टेशन और दूरस्थ स्थानों के लिए उच्च डेटा दर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए विकसित किया गया है।
जानकारी के अनुसार, इस प्रणाली का इस्तेमाल उन दूरस्थ स्थानों पर किया जा सकता है, जहां नागरिक संचार ग्रिड मौजूद नहीं है।
डीआरडीओ ने परीक्षण से जुड़ी कुछ तस्वीरें भी साझा कीं।
संगठन ने बताया,‘‘दोनों प्रणालियों ने उपयोगकर्ता द्वारा परिभाषित परिचालन मानदंडों को पूरा करते हुए मजबूत और विश्वसनीय प्रदर्शन किया। यह उपलब्धि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए स्वदेशी और मिशन महत्वपूर्ण संचार समाधान विकसित करने की डीआरडीओ की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है।’’
भाषा पारुल नरेश
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