नयी दिल्ली, 28 फरवरी ( भाषा ) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) अध्यक्ष को प्रदेश संघों के कामकाज को संभालने का एकतरफा फैसला लेने का अधिकार नहीं है और तदर्थ समिति के गठन का प्रस्ताव इसकी आमसभा में रखा जाना चाहिये ।
जस्टिस सचिन दत्ता ने आईओए अध्यक्ष पी टी उषा द्वारा एक जनवरी को लिया गया फैसला भी दरकिनार कर दिया जिसमें उन्होंने बिहार ओलंपिक संघ का कामकाज देखने के लिये तदर्थ समिति का गठन किया था ।
अदालत ने याचिकाकर्ता को तीन महीने के भीतर चुनाव कराने के निर्देश दिये और ऐसा नहीं करने पर आईओए को उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार रहेगा ।
बिहार ओलंपिक संघ की ओर से वकील नेहा सिंह ने कई आधार पर फैसले को चुनौती दी थी जिसमें यह तर्क भी शामिल था कि अध्यक्ष द्वारा तदर्थ समिति का गठन भारतीय ओलंपिक संघ के नियमों के खिलाफ एकतरफा किया गया था।
जस्टिस दत्ता ने 24 फरवरी को कहा कि एक राज्य संघ के ‘‘मामलों को देखने के लिये’’ एक तदर्थ समिति का गठन करना उसकी कार्यकारी समिति को निलंबित करने के समान था और आईओए के संविधान के तहत यह अधिकार आईओए की आम सभा को है, अध्यक्ष को नहीं ।
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मोना आनन्द
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