नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) पूंजी बाजार नियामक सेबी ने सोमवार को मवाना शुगर्स के एक प्रवर्तक को कंपनी की प्रतिभूतियों में भेदिया कारोबार (इनसाइडर ट्रेडिंग) के जरिए प्राप्त 6.17 करोड़ रुपये वापस करने का निर्देश दिया।
यह आदेश तब आया जब सेबी ने सितंबर 2017 से फरवरी 2018 की अवधि के लिए मवाना शुगर्स लिमिटेड (एमएसएल) के प्रवर्तक (प्रमोटर) और विशेष सलाहकार सिद्धार्थ श्रीराम की ट्रेडिंग गतिविधियों की जांच की, जबकि कथित तौर पर उनके पास अप्रकाशित मूल्य-संवेदनशील जानकारी (यूपीएसआई) थी।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने बाजार मानदंडों और भेदिया कारोबार निषेध (पीआईटी) नियमों के प्रावधानों के संभावित उल्लंघन का पता लगाने के लिए जांच की।
जांच के दौरान, सिद्धार्थ श्रीराम का मई 2021 में निधन हो गया था। मृत्यु के बाद, सिद्धार्थ के शेयर उनके बेटे या उनके कानूनी उत्तराधिकारी कृष्ण श्रीराम को हस्तांतरित कर दिए गए थे।
एमएसएल की वेबसाइट पर उपलब्ध कराए गए निदेशक मंडल की सूची (13 अगस्त, 2024 तक) से, सेबी ने पाया कि नोटिस प्राप्तकर्ता (कृष्ण श्रीराम) एमएसएल के ‘बोर्ड के चेयरमैन’ हैं।
आदेश में कहा गया है कि इस प्रकार, कानूनी प्रावधानों और वापसी की अवधारणा के आसपास के उदाहरणों को ध्यान में रखते हुए, सिद्धार्थ श्रीराम के कानूनी उत्तराधिकारी/कानूनी प्रतिनिधि होने के नाते कृष्ण श्रीराम यूपीएसआई के कब्जे में रहते हुए एमएसएल के शेयरों में व्यापार करके बचाए गए गलत लाभ/हानि को वापस करने के लिए उत्तरदायी हैं।
तदनुसार, नियामक ने कृष्णा श्रीराम को 45 दिनों के भीतर 6.17 करोड़ रुपये वापस करने को कहा है, साथ ही 24 नवंबर, 2017 से इस आदेश की तारीख तक की गणना की जाने वाली 12 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज भी देना होगा।
यदि नोटिस प्राप्तकर्ता इस आदेश की तारीख से 45 दिनों के भीतर ब्याज सहित राशि का भुगतान करने में विफल रहता है, तो ब्याज राशि के वास्तविक भुगतान की तारीख तक जोड़ा जाता रहेगा।
नियामक ने आदेश में कहा कि नोटिस प्राप्तकर्ता से वापस ली गई राशि निवेशक शिक्षा और संरक्षण कोष में जमा की जाएगी।
भाषा राजेश राजेश पाण्डेय
पाण्डेय
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.