नयी दिल्ली, 29 अक्टूबर (भाषा) दक्षिण कोरिया के पॉस्को समूह ने मंगलवार को सज्जन जिंदल के जेएसडब्ल्यू समूह के साथ भारत में एक एकीकृत इस्पात संयंत्र स्थापित करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस संयंत्र की शुरुआती क्षमता 50 लाख टन सालाना की होगी। उद्योग के अनुमान के अनुसार, इसपर करीब 40,000 करोड़ रुपये की लागत आ सकती है।
इस संबंध में जेएसडब्ल्यू समूह की ओर से जारी बयान में प्रस्तावित एकीकृत इस्पात संयंत्र के निवेश या स्थान का विवरण नहीं दिया गया है। उद्योग के अनुमान के अनुसार, 10 लाख टन क्षमता की नई इस्पात परियोजना पर लगभग 8,000 करोड़ की लागत आती है।
घरेलू कारोबारी घराने ने बयान में कहा, ‘‘ जेएसडब्ल्यू समूह (जेएसडब्ल्यू) ने दक्षिण कोरिया के पॉस्को समूह (पॉस्को) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें भारत में इस्पात, बैटरी सामग्री और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग की रूपरेखा तैयार की गई है।’’
मुंबई के जेएसडब्ल्यू समूह के कॉरपोरेट मुख्यालय में जिंदल, पॉस्को के चेयरमैन चांग इन-ह्वा और दोनों व्यापारिक घरानों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
पॉस्को के लिए यह भारत में एक बड़ी इस्पात इकाई स्थापित करने की उसकी दीर्घकालिक महत्वाकांक्षा को पूरा करेगा, जिससे देश में बढ़ती मांग का लाभ उठाया जा सके।
दक्षिण कोरियाई कंपनी ने इस्पात संयंत्र स्थापित करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की आरआईएनएल तथा निजी स्वामित्व वाले अदाणी समूह के साथ सहयोग की संभावनाओं पर भी गौर किया था।
समझौता ज्ञापन के एक हिस्से के तहत जेएसडब्ल्यू समूह तथा पॉस्को दोनों इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) से संबंधित बैटरी सामग्री के क्षेत्र में सहयोग तथा प्रस्तावित एकीकृत इस्पात संयंत्र की खुद की (कैप्टिव) जरूरत को पूरा करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशेंगे।
जेएसडब्ल्यू समूह के चेयरमैन सज्जन जिंदल ने कहा, ‘‘ पॉस्को के साथ यह एमओयू भारतीय इस्पात उद्योग में योगदान देने की हमारी यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में भारत सतत विकास के लिए जबर्दस्त अवसर प्रस्तुत करता है और पॉस्को के साथ हमारी साझेदारी उस बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए जेएसडब्ल्यू की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘ साथ मिलकर, हमारा लक्ष्य प्रौद्योगिकी और स्थिरता में एक ऐसा मानक स्थापित करना है जो भारत तथा उसके बाहर विनिर्माण के भविष्य को आकार दे सके।’’
यह साझेदारी भारत में 50 लाख टन सालाना की शुरुआती क्षमता वाले एक एकीकृत इस्पात संयंत्र की स्थापना पर केंद्रित होगी।
पॉस्को के चेयरमैन चांग इन-ह्वा ने कहा, ‘‘ यह सहयोग दक्षिण कोरिया और भारत की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देगा। साथ ही अधिक पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ भविष्य की दिशा में हमारे संयुक्त प्रयासों को आगे बढ़ाएगा।’’
चांग ने कहा, ‘‘ जेएसडब्ल्यू की अग्रणी विनिर्माण उपस्थिति और मजबूत परियोजना निष्पादन क्षमताएं पॉस्को की प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता के साथ मिलकर भारतीय इस्पात व ऊर्जा क्षेत्रों के लिए अत्याधुनिक समाधान विकसित करने को एक मजबूत मंच तैयार करेंगी।’’
पॉस्को कई साल से भारतीय बाजार में उतरने की कोशिश कर रही है। इसके पहले के प्रयासों में ओडिशा में 12 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश से 1.2 करोड़ टन की परियोजना स्थापित करना शामिल है। हालांकि, भूमि अधिग्रहण में अत्यधिक देरी के कारण उसे अपनी इस योजना को छोड़ना पड़ा था।
बाद में कंपनी ने अपनी हरित इस्पात संयंत्र परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) के साथ अनुबंध किया। हालांकि, किस्मत ने उस समय भी पॉस्को का साथ नहीं दिया और आरआईएनएल ने 2021 में मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद विनिवेश का रास्ता चुना।
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने जनवरी, 2021 में निजीकरण के माध्यम से रणनीतिक विनिवेश के जरिये आरआईएनएल (जिसे विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र या ‘विजाग स्टील’ भी कहा जाता है) में सरकार की हिस्सेदारी के 100 प्रतिशत विनिवेश के साथ-साथ इसकी अनुषंगी कंपनियों/संयुक्त उद्यमों में आरआईएनएल की हिस्सेदारी की बिक्री को भी ‘‘सैद्धांतिक’’ मंजूरी दे दी थी।
इससे पहले 2022 में पॉस्को ने उद्योगपति गौतम अदाणी नीत अदाणी समूह के साथ एक शुरुआती समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। दोनों ने गुजरात में एक एकीकृत ‘स्टील मिल’ स्थापित करने सहित परियोजनाओं पर करीब पांच अरब डॉलर का निवेश करने के लिए व्यावसायिक अवसरों का पता लगाने को समझौता किया था।
भाषा निहारिका अजय
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