कोलंबो, 27 अगस्त (भाषा) कट्टरपंथी तमिल राष्ट्रवादी पार्टी ने 21 सितंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव का बहिष्कार करने के लिए अभियान शुरू किया है।
पार्टी का कहना है कि किसी भी प्रमुख उम्मीदवार ने संघीय ढांचे के तहत देश के उत्तरी और पूर्वी तमिल बहुल इलाकों को राजनीतिक स्वायत्ता देने का वादा नहीं किया है। स्थानीय चुनाव निगरानी समूहों ने मंगलवार के यह जानकारी दी।
तमिल नेशनल पीपुल्स फ्रंट (टीएनपीएफ) के महासचिव सेल्वराजा कजेंद्रन ने इसके साथ ही पुलिस के खिलाफ शिकायत की कि शनिवार को तिरुक्कोविल में उन्हें अभियान के तहत पर्चियां बांटने से रोका गया।
टीएपीएफ ने निर्वाचन आयोग और मानवाधिकार आयोग से उनके अभियान को रोकने पर पुलिस के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
कजेंद्रन ने कहा कि उन्होंने चुनाव का बहिष्कार करने की अपील की है क्योंकि किसी भी प्रमुख उम्मीदवार ने अबतक संघीय ढांचे के तहत तमिल बहुल उत्तरी और पूर्वी इलाके में तमिलों की मांग के अनुरूप राजनीतिक स्वायत्ता देने का वादा नहीं किया है।
निगरानी समूह ने कजेंद्रन के हवाले से कहा, ‘‘ अगर कोई तमिलों के लिए संघीय ढांचे के समाधान की पेशकश नहीं करता तो हम बहिष्कार अभियान बंद नहीं करेंगे।’’
इस बीच, अगले महीने होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में तमिल मतदाताओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती नजर आ रही है क्योंकि अलग-अलग तमिल समूह अलग-अलग दिशा में जाते प्रतीत हो रहे हैं।
मुख्य तमिल पार्टी तमिल नेशनल अलायंस (टीएनए) ने अबतक आधिकारिक रूप से फैसला नहीं किया है कि बहुसंख्यक सिंहली समुदाय के किस प्रमुख उम्मीदवार का समर्थन करना है।
टीएनए के एक धड़े ने साझा तमिल उम्मीदवार का समर्थन किया है जिसे पार्टी की इच्छा के विपरीत मैदान में उतारा गया है।
तमिल बहुल क्षेत्र के 22 लाख पंजीकृत उम्मीदवार किसी भी अग्रणी उम्मीदवार की जीत के लिए जरूरी 50 प्रतिशत या इससे अधिक मत प्राप्त करने के लिए अहम हैं।
निवर्तमान राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे, उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी सजीत प्रेमदासा और मार्क्सवादी जेवीपी नेता अनुरा कुमार दिसानायके को इस चुनाव में सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
भाषा धीरज संतोष
संतोष
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
