कोलंबो, 22 अगस्त (भाषा) नागरिकों के मूल अधिकारों के हनन को लेकर श्रीलंका सरकार की आलोचना करते हुए, देश के उच्चतम न्यायालय ने उसे स्थानीय परिषद चुनाव जल्द से जल्द कराने का आदेश दिया है।
न्यायालय की पांच सदस्यीय पीठ ने विपक्ष और नागरिक समाज समूहों द्वारा दायर चार याचिकाओं के जवाब में यह फैसला सुनाया। पिछले साल की शुरुआत से 340 से अधिक स्थानीय परिषदों के चुनाव टाले गए हैं।
शीर्ष अदालत ने पाया कि निर्वाचन आयोग के सदस्यों और राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे, जिनके पास वित्त मंत्रालय का भी प्रभार है, ने चुनाव कराने में नाकाम रहकर नागरिकों के मूल अधिकारों का हनन किया है।
स्थानीय चुनाव, जो पिछले साल 9 मार्च को होने थे, वित्त मंत्रालय के इस दावे के कारण नहीं हो पाए कि वह मौजूदा आर्थिक संकट के बीच चुनाव खर्च का बोझ नहीं उठा सकता।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया और कहा कि मंत्रालय ने चुनाव कराने में पूरी तरह असमर्थ होने के अपने दावे के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं दिए।
अदालत ने कहा, ‘‘आर्थिक संकट और कठिनाइयों का उल्लेख करने के अलावा, वित्त मंत्रालय के सचिव के हलफनामे में, चुनाव कराने में पूरी तरह असमर्थता जताने के समर्थन में पर्याप्त सामग्री नहीं दी गई है।’’
अंतरिम आदेश में न्यायालय ने वित्त मंत्रालय को स्थानीय परिषद चुनाव के लिए आवश्यक धनराशि आवंटित करने का निर्देश दिया।
न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि स्थानीय परिषद चुनाव को निर्वाचन आयोग द्वारा अन्य चुनावों की तैयारियों में बाधा डाले बिना कराया जाना चाहिए, जिसमें 21 सितंबर को होने वाला राष्ट्रपति चुनाव भी शामिल है।
भाषा सुभाष पवनेश
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