(सज्जाद हुसैन)
इस्लामाबाद, छह अगस्त (भाषा) पाकिस्तान की संसद के निचले सदन नेशनल असेंबली ने निर्धारित अवधि के बाद निर्दलीय सांसदों के किसी भी दल में शामिल होने पर रोक लगाने संबंधी विधेयक को मंगलवार को पारित कर दिया।
जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया।
चुनाव अधिनियम संशोधन विधेयक 2024 को सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के सदस्यों बिलाल कयानी और ज़ैब जाफर ने असेंबली में पेश किया था। विपक्षी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के विरोध के बावजूद नेशनल असेंबली ने बहुमत से इसे पारित कर दिया।
इस संशोधन के जरिये चुनाव अधिनियम की धाराओं 66 और 104 में बदलाव किया गया है तथा निर्दलीय उम्मीदवारों पर संवैधानिक एवं कानूनी रूप से परिभाषित अवधि के बाद राजनीतिक दलों में शामिल होने पर रोक लगा दी गयी है।
संशोधित कानून में यह भी कहा गया है कि निर्धारित अवधि के अंदर आरक्षित सीट की सूची सौंपने में विफल रहने पर राजनीतिक दल इन सीट के लिए पात्र नहीं रह जायेंगे।
इसमें यह भी कहा गया है कि निर्वाचन/पीठासीन अधिकारी के समक्ष जो उम्मीदवार पार्टी संबद्धता का हलफनामा नहीं देंगे, उन्हें निर्दलीय समझा जाएगा तथा चुनाव बाद पार्टी से संबद्धता की उनकी घोषणा को मान्यता नहीं दी जाएगी।
विधेयक पर मतविभाजन शुरु होने पर विपक्षी सदस्य अपनी सीट पर खड़े हो गये और विरोध करने लगे। वे आसन के समीप आ गये और उन्होंने विधेयक की प्रतियां फाड़ दीं। उन्होंने ‘विधेयक नामंजूर’,‘ न्यायपालिका एवं लोकतंत्र पर हमला नामंजूर’ के नारे लगाये और सरकार की निंदा की।
खान की पार्टी के अली मुहम्मद खान ने बाद में कहा कि उनकी पार्टी इस कानून के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख करेगी, जो इसे खारिज कर देगा क्योंकि यह विधेयक एक राजनीतिक दल की फासीवादी सोच को दर्शाता है।
कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने कहा कि 81 सदस्यों ने सुन्नी इत्तेहाद काउंसिल (एसआईसी) के सदस्य के रूप में शपथ ली और अब कह रहे हैं कि वे किसी दूसरी पार्टी के सदस्य हैं।
उन्होंने कहा कि संशोधन का उद्देश्य चुनाव कानून में स्पष्टता लाना है।
भाषा राजकुमार सुभाष
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