नयी दिल्ली, 24 दिसंबर (भाषा) दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय ने स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर गुणवत्ता मानक जांच में विफल हुई दवाओं को वापस लेने का निर्देश दिया है।
उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने इस मामले की सीबीआई जांच की अनुशंसा की थी, जिसके बाद निदेशालय ने यह निर्देश दिया है।
सक्सेना ने दिल्ली सरकार के अस्पतालों में ‘गुणवत्ता मानक परीक्षण में विफल’ रहीं और ‘जीवन को खतरे में डालने की गुंजाइश’ वाली दवाओं की कथित आपूर्ति की जांच की सिफारिश की थी।
अधिकारियों के अनुसार जो दवाएं ‘घटिया गुणवत्ता’ की पाई गईं, उनमें फेफड़ों और मूत्र तंत्र के संक्रमण के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली महत्वपूर्ण जीवन रक्षक एंटीबायोटिक सेफैलेक्सिन शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि फेफड़ों, जोड़ों और शरीर में सूजन को ठीक करने के लिए एक स्टेरॉयड ‘डेक्सामेथासोन’, मिर्गी-रोधी और चिंता विकार-रोधी मनोरोग दवा ‘लेवेतिरसेटम’ और उच्च रक्तचाप-रोधी दवा ‘एम्लोडेपिन’ भी शामिल है।
सतर्कता निदेशालय ने स्वास्थ्य सचिव को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा है कि ऐसी दवाओं के लिए कंपनियों को कोई भुगतान नहीं किया जाए।
चौबीस दिसंबर के आधिकारिक पत्र में कहा गया है, ‘आपसे यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया जाता है कि ऐसी सभी दवाएं जो निर्धारित मानदंडों में विफल रही हैं, उनकी मात्रा तत्काल पता लगायी जानी चाहिए और कानून की उचित प्रक्रिया के अनुसार जब्त की जानी चाहिए।’
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