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Saturday, 28 February, 2026
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एशियाड पदक विजेता पूवम्मा की डोप प्रतिबंध के बाद वापसी, कहा ‘मानसिक रूप से परेशान’ हुई

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(फिलेम दीपक सिंह)

नयी दिल्ली, दो नवंबर (भाषा) एशियाई खेलों की पदक विजेता चौकड़ी की सदस्य एम आर पूवम्मा की डोप प्रतिबंध के बाद वापसी उतार-चढ़ाव भरी रही क्योंकि केरल उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद ही नाडा की डोपिंग रोधी अपीलीय पैनल (एडीएपी) ने अंतत: उनके पक्ष में फैसला कर वापसी की तारीख की घोषणा की।

पूवम्मा 2014 और 2018 एशियाई खेलों की व्यक्तिगत 400 मीटर और चार गुणा 400 मीटर रिले रेस में कई पदक जीत चुकी हैं। इस 33 साल की एथलीट ने बुधवार को राष्ट्रीय खेलों में कर्नाटक के लिए वापसी की।

राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए अपने पूर्व के फैसले की समीक्षा की और ऐसा केरल उच्च न्यायालय के आदेश के बाद हुआ और उसने कहा कि जून 2022 में पूवम्मा पर लगा दो साल का प्रतिबंध नमूने एकत्रित करने की तारीख (18 फरवरी 2021) से ही शुरू होना चाहिए।

पूवम्मा ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी जिसके बाद ही यह फैसला आया। पूवम्मा ने अपने प्रतिबंध की शुरुआती तारीख के बारे में स्पष्टता की मांग की थी कि यह 16 जून 2022 (एडीएपी का फैसला) या 18 फरवरी 2021 (नमूना एकत्रित करने की तारीख) कौन सी तारीख होनी चाहिए।

वहीं एडीएपी के 16 जून 2022 को दिये गये फैसले में एक गलती हुई कि इसमें उनके दो साल के प्रतिबंध की शुरुआत की तारीख का जिक्र नहीं था।

कर्नाटक में जन्मीं पूवम्मा ने केरल के अंतरराष्ट्रीय स्तर के 400 मीटर पूर्व धावक जितिन पॉल से शादी की है इसलिये उन्होंने केरल उच्च न्यायालय में याचिका डाली।

राष्ट्रीय खेलों में यह उनकी दूसरी वापसी हुई क्योंकि 28 जुलाई को पूवम्मा ने श्रीलंकाई राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में हिस्सा लिया था जब भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) ने सूचित किया था कि उनका दो साल का प्रतिबंध समाप्त हो गया है।

लेकिन नाडा ने बाद में पूवम्मा को लिखा कि यह गलती से हुआ था और उन्होंने एएफआई को उनके प्रतिबंध के समय के बारे में सूचित कर दिया है जो अगले साल जून तक चलेगा (16 जून 2022 को आये एडीएपी के फैसले के दो साल बाद)।

नाडा ने दो बार उन्हें नोटिस जारी किया जिसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

पूवम्मा के लिए वापसी की तारीख जानने की कोशिश करने के दौरान का समय मानसिक रूप से काफी परेशानी भरा रहा और इसमें उन्होंने काफी समय भी गंवा दिया।

पूवम्मा ने गोवा से पीटीआई से कहा, ‘‘आखिर में मैं अब वापसी कर सकती हूं। यह कठिन परीक्षा खत्म हुई, हालांकि इससे मैं मानसिक रूप से काफी परेशान हुई। ’’

इस दौरान पूवम्मा ने स्विट्जरलैंड स्थित खेलों की खेल पंचाट (सीएएस) का भी दरवाजा खटखटाया था। लेकिन इसमें सुनवाई शुरू करने के लिए उन्हें थोड़े समय में ही छह लाख रूपये जमा करने के लिए कहा गया था।

भाषा नमिता सुधीर

सुधीर

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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