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Tuesday, 24 February, 2026
होमखेलहांगझोउ में पदकों की रिकॉर्ड संख्या से पेरिस ओलंपिक में दमदार प्रदर्शन की उम्मीद जगी

हांगझोउ में पदकों की रिकॉर्ड संख्या से पेरिस ओलंपिक में दमदार प्रदर्शन की उम्मीद जगी

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… फिलेम दीपक सिंह…

हांगझोउ, आठ अक्टूबर (भाषा) हांगझोउ एशियाई खेलों में 107 पदकों के रिकॉर्ड के साथ भारतीय खिलाड़ियों ने देश के खेल इतिहास में एक शानदार अध्याय लिखने के साथ ही अगले साल पेरिस में होने वाले ओलंपिक खेलों में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की उम्मीदें जगा दी हैं। भारत ने एशियाई खेलों में लगभग 660 खिलाड़ियों के दल को भेजा था। भारतीय दल ने इन खेलों में  रिकॉर्ड 28 स्वर्ण, 38 रजत और 41 कांस्य पदक जीते। कुल पदकों की संख्या 2018 में हुए जकार्ता खेलों की तुलना में 37 अधिक है। भारतीय खिलाड़ियों ने निशानेबाजी और तीरंदाजी जैसी कुछ स्पर्धाओं में अपनी उम्मीदों से काफी बेहतर प्रदर्शन किया। भारत इन खेलों की पदक तालिका में चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के बाद चौथे स्थान पर रहा जो कि खिलाड़ियों  के दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत का प्रमाण है। इनमें से कई खिलाड़ी पहली बार बड़े मंच पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। रैंकिंग के लिहाज से भी महाद्वीप में भारत का कद कई पायदान ऊपर बढ़ गया। पदक तालिका में चौथा स्थान 1951 और 1962 में क्रमशः  दूसरे और तीसरे स्थान के बाद भारत का सर्वकालिक तीसरा सर्वश्रेष्ठ है। भारत 2018 जकार्ता खेलों की तालिका में आठवें स्थान पर था। यहां की ऐतिहासिक सफलता ओलंपिक की मेजबानी को लेकर भारत की महत्वाकांक्षाओं को बढ़ावा दे सकती है। इस बात की संभावना है कि सरकार 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के सामने खाका पेश करने पर विचार कर रही है। आईओसी के सत्र का आयोजन इस महीने मुंबई में होना है। तोक्यो 2020 खेलों में भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के बाद एशियाई खेलों की अभूतपूर्व सफलता से इस बात का संकेत मिलता है कि देश के खिलाड़ियों से 2024 पेरिस में दोहरे अंक में पदक की संख्या की उम्मीद की जा सकती है। इन खेलों के शुरू होने से पहले भारतीय ओलंपिक संघ के अधिकारियों ने 100 पदकों का लक्ष्य रखा था। भारतीय खिलाड़ियों के खेलों के पहले दिन से पदक जीतना शुरू किया और यह उनके प्रतिस्पर्धा के आखिरी दिन तक जारी रहा। ओलंपियन नीरज चोपड़ा की मौजूदगी ने भारतीय दल के हौसले को बढ़या। इसमें कोई शक नहीं है कि भाला फेंक में इस खिलाड़ी के ओलंपिक स्वर्ण पदक ने दूसरे एथलीटों को भी प्रेरित किया। भारतीय खेमे को हालांकि कुछ निराशा का भी सामना करना पड़ा। सबसे बड़ी निराशा कुश्ती में बजरंग पूनिया को मिली शिकस्त से हुई। भारोत्तोलन में मीराबाई चानू चौथे स्थान पर रही जबकि बैडमिंटन में पीवी सिंधू को क्वार्टर फाइनल में हार का सामना करना पड़ा।  मुक्केबाजी में विश्व चैम्पियन लवलीना बोरगोहेन को स्वर्ण पदक का तगड़ा दावेदार माना जा रहा था लेकिन वह फाइनल मुकाबले में हार गयी। एथलेटिक्स और निशानेबाजी से देश को सबसे अधिक क्रमशः 29 और 22 पदक मिले। इन दोनों की संख्या भारत के कुल और स्वर्ण पदकों की संख्या का लगभग आधा है। निशानेबाजी में सर्वाधिक सात स्वर्ण पदक मिले जबकि एथलेटिक्स में छह स्वर्ण पदक मिले। तीरंदाजों ने इन खेलों में अप्रत्याशित प्रदर्शन किये। तीरंदाजों ने 2018 सत्र में सिर्फ दो रजत के बाद बड़ा सुधार करते हुए पांच स्वर्ण सहित नौ पदक दिए। एशियाई खेलों के किसी भी संस्करण में तीरंदाजी में यह भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। भारत के कंपाउंड तीरंदाजों ने अविस्मरणीय  प्रदर्शन करते हुए सभी पांच स्वर्ण पदक जीते। कंपाउंड तीरंदाज ज्योति सुरेखा वेन्नम और ओजस प्रवीण देवतले ने तीन-तीन स्वर्ण पदक जीते, जो किसी भी खेल में भारतीयों के बीच सबसे अधिक पीला तमगा है। अविनाश साबले (पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज), अन्नू रानी (महिलाओं की भाला फेंक) और पारुल चौधरी (महिलाओं की 5000 मीटर) ने खेलों में अपनी-अपनी स्पर्धाओं में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीता, जबकि पुरुषों की चार गुणा 400 मीटर रिले टीम ने 61 साल में पहली बार शीर्ष स्थान हासिल किया। निशानेबाजों ने भी सात स्वर्ण, नौ रजत और छह कांस्य के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। पलक गुलिया (10 मीटर एयर पिस्टल) और सिफत कौर समरा (50 मीटर राइफल थ्री-पोजिशन) ने व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीते, जबकि अन्य पांच स्वर्ण टीम स्पर्धाओं में मिले। ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर चार पदकों के साथ खेलों में भारत के सबसे सफल निशानेबाज बन गए । उन्होंने पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल और 50 मीटर राइफल थ्री-पोजिशन टीम स्पर्धा में स्वर्ण और व्यक्तिगत 50 मीटर राइफल  थ्री-पोजिशन और 10 मीटर एयर राइफल में क्रमश: रजत और कांस्य पदक हासिल किया। चार पदक जीतने वाली एक अन्य निशानेबाज ईशा सिंह थीं, जिन्होंने मनु भाकर और रिदम सांगवान के साथ मिलकर 25 मीटर पिस्टल में स्वर्ण और पलक गुलिया और दिव्या टीएस के साथ 10 मीटर एयर पिस्टल में रजत पदक जीता। उन्होंने 25 मीटर और 10 मीटर एयर पिस्टल दोनों में व्यक्तिगत रजत पदक भी जीते। सर्वाधिक पदकों के मामले में, ऐश्वर्या और ईशा भारतीयों की सूची में शीर्ष पर हैं। भारत ने हॉकी और कबड्डी में स्वर्ण पदक के साथ इन खेलों में अपना दबदबा फिर से कायम किया। भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने टूर्नामेंट में अपना दबदबा बनाया और स्वर्ण पदक के साथ 2024 ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया। फाइनल में भारत ने जापान को 5-1 से हराया। इससे पहले, भारत ने पूल चरण में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 10-2 से करारी शिकस्त दी थी। भारतीय महिला हॉकी टीम को सेमीफाइनल में मेजबान चीन से 0-4 से हारकर कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। रोहन बोपन्ना और रुतुजा भोसले ने टेनिस मिश्रित युगल का स्वर्ण भी जीता। भारत ने क्रिकेट और कबड्डी में महिला और पुरुष टीमों ने भी स्वर्ण पदक जीते, जबकि स्क्वाश से भी देश को दो स्वर्ण पदक मिले। चिराग शेट्टी और सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी की स्टार भारतीय पुरुष युगल जोड़ी ने देश के लिए पहला बैडमिंटन स्वर्ण जीतकर इतिहास रच दिया। घुड़सवारी में सुदीप्ति हजेला, दिव्यकृति सिंह, विपुल हृदय और अनुश अग्रवाल की चौकड़ी ने पहली बार ड्रेसेज स्वर्ण जीता। भारत ने  पाल नौकायन के डिंगी स्पर्धा में 29 साल में अपना पहला पदक जीता जबकि इस आयोजन में पदक स्पर्धा में पहली बार शामिल ई-स्पोर्ट्स से निराशा मिली। भारतीय पहलवानों ने भी अपने पदकों की संख्या छह (1 रजत, 5 कांस्य) तक बढ़ा दी, हालांकि इस बार उन्हें कोई स्वर्ण पदक नहीं मिला। उन्होंने 2018 एशियाई खेलों में दो स्वर्ण और एक कांस्य जीता था। हांगझोउ एशियाई खेलों ने पैदल चाल खिलाड़ी राम बाबू और डिंगी के सलाम सुनील सिंह जैसे साधारण पृष्ठभूमि के कई भारतीय एथलीटों को भी मौका दिया, जो उनके जीवन के सुनहरे पल थे। इन खेलों में भारतीय खिलाड़ियों को कई विवादों का सामना भी करना पड़ा। भारत के स्टार खिलाड़ी ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा के भाला फेंक स्पर्धा के दौरान पहला थ्रो को नहीं मापे जाने पर बड़ा विवाद पैदा हो गया है। अपने जमाने की दिग्गज एथलीट अंजू बॉबी जार्ज ने चीन के अधिकारियों पर ‘धोखाधड़ी का प्रयास करने’ और भारतीयों को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया। इससे पहले 100 मीटर बाधा दौड़ में ज्योति याराजी और चीन की वु यान्नी को ‘फाल्स स्टार्ट’ के कारण अयोग्य करार दिया गया लेकिन बाद में जज ने उन्हें रेस में भाग लेने की अनुमति दी । चीन की लिन युवेइ ने 12 . 74 सेकंड में स्वर्ण पदक जीता जबकि यान्नी दूसरे और याराजी तीसरे स्थान पर रही थी । भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) ने तुरंत विरोध दर्ज किया और तकनीकी नियम 16 . 8 के तहत यान्नी को अयोग्य करार दिया गया जबकि याराजी का कांस्य पदक रजत में बदल गया। एक अन्य दुखद घटना में 2018 एशियाई खेलों में महिला हेप्टाथलन प्रतियोगिता की स्वर्ण विजेता स्वप्ना बर्मन ने पदक जीतने में असफल रहने के बाद, कांस्य पदक जीतने वाली हमवतन नंदिनी अगासरा पर ट्रांसजेंडर होने का आरोप लगाया। स्वप्ना ने हालांकि बाद में देश और अपनी साथी खिलाड़ी से माफी मांगी। एशियाई खेलों से ठीक पहले, अरुणाचल प्रदेश के तीन वुशु खिलाड़ियों ओनिलु तेगा, न्येमान वांगसु और मेपुंग लाम्गु को चीन की सरकार द्वारा नत्थी वीजा दिया गया था, जिसे भारत ने अस्वीकार कर दिया था। ये तीनों खिलाड़ी एशियाई खेलों में भाग नहीं ले सके और इसके विरोध में खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने अपना चीन दौरा रद्द कर दिया। भाषा आनन्द पंतपंत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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