देहरादून, छह सितंबर (भाषा) उत्तराखंड सरकार ने बुधवार को पृथक राज्य आंदोलन में हिस्सा लेने वाले चिह्नित आंदोलनकारियों तथा उनके आश्रितों को राजकीय सेवा में 10 प्रतिशत आरक्षण देने वाला बहुप्रतीक्षित विधेयक राज्य विधानसभा में पेश किया।
लंबे आंदोलन के बाद 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड का गठन हुआ।
उत्तराखंड राज्य आंदोलन के चिह्नित आंदोलनकारियों तथा उनके आश्रितों को राजकीय सेवा में आरक्षण विधेयक 2023 के तहत लोक सेवा आयोग की परिधि के बाहर के समूह ‘ग’ और ‘घ’ के पदों पर सीधी भर्ती द्वारा नियुक्ति दिए जाने में आयु सीमा तथा चयन प्रक्रिया में एक बार छूट प्रदान की जाएगी।
यह केवल उन आंदोलनकारियों पर लागू होगा जो पृथक आंदोलन के दौरान घायल हुए हों या सात दिन या उससे अधिक अवधि के लिए जेल गए हों और उनके पास इससे संबंधित प्रामाणिक दस्तावेज हों।
विधेयक के अनुसार, अगर किसी चिह्नित आंदोलनकारी की आयु 50 वर्ष से अधिक है या वह शारीरिक अथवा मानसिक रूप से अक्षम होने के कारण स्वयं सेवा करने में अनिच्छुक हैं तो उनके एक आश्रित को उत्तराखंड की राज्याधीन सेवाओं में 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जाएगा।
भाषा दीप्ति नोमान शफीक
शफीक
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